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मध्यप्रदेश में सरकारी डॉक्टर्स की हड़ताल, मरीजों को करना पड़ रहा है परेशानियों का सामना

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मध्यप्रदेश में डॉक्टरों और सरकार के बीच डीएसीपी को केंद्र की बराबर करने को लेकर चल रहे विवाद में सरकारी डॉक्टर्स हड़ताल पर चले गए हैं। प्रदेश के 15 हजार डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं। जिसका असर सभी सरकारी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर दिखाई दे रहा है। जिससे गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज ज्यादा परेशान हैं। भोपाल में हड़ताल का असर कुछ ज्यादा ही देखने को मिला है। कुछ मरीजों को प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट किया गया है। गाँधी मेडिकल कॉलेज से सम्बन्ध हमीदिया अस्पताल में 32 मरीजों के रूटीन ओप्रशन को टाल दिया गया है। इंदौर में प्राइवेट डॉक्टर्स को ड्यूटी पर लगाया गया है।

आपको बता दें कि हड़ताल को ख़त्म करने के लिए मंगलवार रात 8 बजे चिकित्सा  शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग के आवास पर बैठक हुई। इस बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी, गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और चिकित्सक संघठन के पदाधिकारी मौजूद रहे। बैठक करीब एक घंटे तक चली। लेकिन बैठक में कोई भी सहमति नहीं बन पायी। डॉक्टर्स  मांग है कि उन्हें केंद्र के बराबर डीएसीपी दिया जाना चाहिए। इस पर मंत्री ने कहा कि कमेटी से एक दो मीटिंग और कर लेते हैं उसके बाद फैसला लेंगे। इस पर डॉक्टर्स ने कहा कि जब तक तो चुनावों की आचार संहिता लग जाएगी। उसके बाद क्या होगा और फिर डॉक्टर्स वहाँ से यह कह कर निकल गए।

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा डॉक्टर्स भगवान् का रूप , हड़ताल खत्म करें

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार की तरफ से लगातार प्रयास किये जा रहे है। डॉक्टर्स के साथ लगातार बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि उनके कई मुद्दे थे जिन पर सहमति बन चुकी है। एक दो मुद्दे थे, जिन पर सहमति नहीं बन पाई है। फिर भी लगातार बातचीत चल रही है। डॉक्टर्स से अनुरोध है कि वह हड़ताल वापिस ले लें। वैसे भी यह मामला मानवता से जुड़ा हुआ है। डॉक्टर्स की समाज में बहुत इज्जत होती है उनको भगवान् माना जाता है। इसलिए उन्हें हड़ताल वापिस लेनी चाहिए।

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