पन्ना में कुआं धंसने से बड़ा हादसा, मलबे में दबकर 5 मजदूरों की मौत
पन्ना जिले के अजयगढ़ थाना क्षेत्र में मंगलवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। ग्राम बिहारपुरवा में निर्माणाधीन कुएं की मिट्टी अचानक धंस गई, जिससे वहां काम कर रहे पांच मजदूर मलबे में दब गए। हादसा इतना अचानक हुआ कि मजदूरों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। घटना के बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई।
बताया जा रहा है कि मजदूर रेत की खदान जैसे गहरे कुएं में खुदाई का काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक कुएं की दीवार और मिट्टी भरभराकर गिर गई। देखते ही देखते सभी मजदूर नीचे दब गए। ग्रामीणों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया और प्रशासन को सूचना दी गई।
मौके पर पुलिस और प्रशासन की टीम पहुंची, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। राहत और बचाव कार्य के लिए जेसीबी मशीनों की मदद ली गई। गांव के लोग भी लगातार मजदूरों को बाहर निकालने में जुटे रहे।
एक ही परिवार के थे सभी मजदूर
हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों की पहचान चुन्नू यादव, रामपाल यादव, राजुमार यादव, आशीष यादव और चुनवाद पाल के रूप में हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, मृतकों में अधिकतर लोग एक ही यादव परिवार के सदस्य थे। परिवार लंबे समय से कुआं खोदने और मजदूरी का काम करता था।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मजदूर काफी गहराई में काम कर रहे थे। अचानक मिट्टी खिसकने लगी और कुछ ही सेकंड में पूरा हिस्सा ढह गया। मजदूरों को संभलने या बाहर भागने का समय नहीं मिल पाया।
घटना के बाद गांव में मातम का माहौल है। मृतकों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जमा हो गए। बचाव टीम ने घंटों की मशक्कत के बाद मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला।
प्रशासन ने बताया कि राहत कार्य लगातार चलाया गया और सभी शवों को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय अधिकारी और पुलिस बल मौके पर पहुंच गए थे।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
मृतकों के परिजनों ने इस हादसे के लिए गांव के प्रधान और जिम्मेदार लोगों पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। एक परिजन ने कहा कि यह कुआं सुरक्षित तरीके से नहीं खोदा जा रहा था। उनका दावा है कि पिछले साल से यहां काम चल रहा था और कुएं का हिस्सा पहले से कमजोर हो चुका था।
परिवार के लोगों का आरोप है कि इसके बावजूद दोबारा वहां खुदाई शुरू करवा दी गई। उन्होंने कहा कि मजदूरों की सुरक्षा के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए थे। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि हादसे के बाद काफी देर तक कोई सरकारी मदद नहीं पहुंची।
एक युवक ने बताया कि हादसे में उसके पिता, भाई, चाचा और रिश्तेदारों की मौत हो गई। उसने कहा कि परिवार के लोग करीब तीन घंटे तक मलबे में दबे रहे, लेकिन समय पर राहत नहीं मिल सकी। ग्रामीणों ने खुद ही शुरुआती बचाव कार्य शुरू किया।
कुछ लोगों ने स्थानीय प्रशासन और सरपंच पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हादसे के बाद जिम्मेदार लोग मौके से चले गए। ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच कराने और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
गांव में पसरा मातम, जांच की मांग
इस हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। गांव के लोगों का कहना है कि यदि सुरक्षा के उचित इंतजाम किए गए होते तो इतनी बड़ी घटना टाली जा सकती थी। प्रशासन ने मामले की जांच के संकेत दिए हैं और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
स्थानीय लोगों ने सरकार से मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता देने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं प्रशासन का कहना है कि घटना की पूरी जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ उचित कदम उठाए जाएंगे।
