झारखण्ड में उच्च न्यायालय की नए भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति मुर्मू ने किया और सीजेआई के हिंदी भाषा में भाषण देने की तारीफ की
राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा झारखण्ड उच्च न्यायलय के नए भवन का उद्घाटन किया गया। यह उच्च न्यायलय अब तक का देश का सबसे बड़ा न्यायिक परिसर है। यह परिसर 165 एकड़ क्षेत्र में फैला है और 72 एकड़ क्षेत्र में उच्च न्यायलय भवन का निर्माण किया गया है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया डीवाई चंद्रचूर्ण के हिंदी में भाषण देने की तारीफ की और ख़ुशी जाहिर की। बता दें कि राष्ट्रपति मुर्मू बुधवार को रांची में झारखण्ड उच्च न्यायलय के उद्घाटन के अवसर पर बोल रही थी। उन्होंने इस दौरान न्यायाधीश को धन्यबाद दिया और कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न भाषाओँ में काम करने की शुरुआत की है। यह जरूरी भी है। झारखण्ड के लोग अंग्रेजी के अलावा अन्य भाषाओँ में सहज हैं।
लोगों को नहीं मिल पाता है न्याय
झारखण्ड उच्च न्यायलय के उद्घाटन समारोह में राष्ट्रपति ने कहा कि कई बार ऐसा भी होता है कि केस खत्म होने और फैसला आने के बाद भी लोगों को न्याय नहीं मिल पाटा है। बहुत से लोग एक एक केस के फैसले के लिए कई कई साल तक लड़ाई लड़ते है जिसमे उनका रूपया पैसा, समय और नींद तक बर्बाद हो जाती है। कुछ मामले तो उच्च न्यायलय तक पहुंच जाते हैं। कुछ मामलों के फैसले सुप्रीम कोर्ट में होते हैं। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित होना चाहिए कि लोगों को सच में न्याय मिले। यह कैसे होगा, यह तो मुझे नहीं पता लेकिन सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, कानून मंत्री, जज और वकील मिलकर इसका रास्ता निकालें।
राष्ट्रपति ने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि मै गांव की ऐसी समिति से जुडी थी जो देखती है कि कोर्ट के फैसले के बाद परिवार किस हाल में है। उस वक्त पता चला कि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। कोर्ट का फैसला आने के बाद भी लोगों को न्याय नहीं मिला। कोर्ट के फैसले के बाद भी उस पर अमल नहीं हुआ। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि ऐसे लोगो की सूचि मेरे पास है जिसे में प्रमुख न्यायाधीश को भेजूंगी। कोर्ट न्याय का मंदिर है जहाँ लोग विश्वास के साथ आते हैं कि उन्हें यहाँ न्याय मिलेगा। लोगों को उनका अधिकार मिलेगा।
प्रत्येक व्यक्ति तक न्याय व्यवस्था का पहुंचना जरूरी
वहीँ चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने कहा कि न्याय प्रणाली का लक्ष्य सामान्य प्राणी को न्याय दिलाना है। देश में आज भी अनगिनत कचहरियां ऐसी है जहाँ महिला शौचालय तक नहीं है। न्याय व्यवस्था को समाज के हर नागरिक तक पहुँचाना होगा। तकनीक के माध्यम से हम अपने कार्य को सामान्य लोगों को जोड़ सकेंगे। उन्होंने आगे कहा कि सर्वोच्च न्यायलय ने अपने निर्णयों को हिंदी भाषा में अनुवाद किया है। यही उम्मीद में उच्च न्यायलय से भी करता हूँ। लाइव स्ट्रीम द्वारा कोर्ट रूम को हर घर में ले जाना बेहतर है।
कार्यक्रम में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, झारखण्ड के सीएम हेमंत सोरेन और झारखण्ड उच्च न्यायलय के चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्र भी मौजूद थे। उन सभी ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया।

