ईरान-इजरायल तनाव पर पुतिन की मध्यस्थता की पेशकश, ट्रंप बोले – पहले अपना युद्ध खत्म करो
मध्य पूर्व में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। इस संकट के समाधान के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहल करते हुए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत की। उन्होंने इस क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए मध्यस्थता का प्रस्ताव रखा, लेकिन ट्रंप ने इस पेशकश को सख्त लहजे में ठुकरा दिया और रूस को पहले यूक्रेन के साथ चल रहा युद्ध खत्म करने की सलाह दी।
ट्रंप का कड़ा जवाब: “पहले रूस–यूक्रेन युद्ध सुलझाओ“
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने अमेरिकी नेता डोनाल्ड ट्रंप से हाल ही में फोन पर बात की थी। इस बातचीत में पुतिन ने मिडिल ईस्ट में इजरायल और ईरान के बीच सुलह की कोशिशों में अमेरिका की भागीदारी की उम्मीद जताई थी। लेकिन ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक रूस खुद यूक्रेन के साथ अपना युद्ध नहीं सुलझाता, तब तक उसे दूसरों के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “पुतिन कह रहे थे कि वह मिडिल ईस्ट में शांति लाना चाहते हैं। मैंने उनसे कहा कि पहले यूक्रेन के साथ चल रहा अपना युद्ध खत्म करो, फिर बाकी दुनिया की चिंता करना।” ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि रूस-यूक्रेन युद्ध में मरने वालों की सही संख्या छुपाई जा रही है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “एक पूरी बिल्डिंग गिरती है और कहा जाता है कि कोई मरा नहीं, क्या ये कोई मजाक है?”
पुतिन की प्रतिक्रिया और रूसी कर्मचारियों की सुरक्षा का भरोसा
व्लादिमीर पुतिन ने 18 जून 2025 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि मिडिल ईस्ट का यह संकट बेहद संवेदनशील है, लेकिन इसका समाधान निकाला जा सकता है। पुतिन ने बताया कि रूस ने अमेरिका, ईरान और इजरायल को कुछ शांति प्रस्ताव भेजे हैं। उनका यह कदम रूस की मध्य पूर्व में बढ़ती कूटनीतिक भागीदारी को दिखाता है।
इसके साथ ही पुतिन ने बुशहर स्थित ईरान के परमाणु ऊर्जा संयंत्र का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि इस न्यूक्लियर प्लांट में रूस की कंपनी रोसाटॉम के 200 से ज्यादा कर्मचारी काम कर रहे हैं। उन्होंने यह दावा भी किया कि इजरायल ने रूस को भरोसा दिया है कि इन कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
ईरान–इजरायल की टकराहट और अमेरिका की सैन्य सक्रियता
ईरान और इजरायल के बीच हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। हाल ही में इजरायल ने दावा किया कि उसने 50 से ज्यादा फाइटर जेट्स के जरिए ईरान के ठिकानों पर हमला किया। इसके जवाब में ईरान ने ड्रोन के माध्यम से कई जवाबी हमले किए। इस सैन्य टकराव ने पूरे क्षेत्र को युद्ध जैसे हालात में ला खड़ा किया है।
अमेरिका ने भी इस मामले में अपनी सैन्य उपस्थिति को मजबूत करना शुरू कर दिया है। मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना की बढ़ती सक्रियता से स्थिति और ज्यादा संवेदनशील होती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही कोई समाधान नहीं निकला तो यह टकराव किसी बड़े युद्ध में बदल सकता है।
फिलहाल मिडिल ईस्ट में स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। रूस समाधान की कोशिश कर रहा है, लेकिन अमेरिका और ट्रंप की आलोचनाओं से उसकी भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि क्या कूटनीति इस संकट को सुलझा पाएगी या फिर हालात और बिगड़ेंगे।
