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राहुल गांधी ने विदेश नीति पर मोदी सरकार को घेरा, गाजा और इजरायल को लेकर उठाए सवाल

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की विदेश नीति पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि भारत की पारंपरिक और स्वतंत्र विदेश नीति कमजोर होती दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत ऐसे समय में इजरायल के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को लगातार मजबूत कर रहा है, जब दुनिया के कई देश उससे दूरी बना रहे हैं। राहुल गांधी ने यह टिप्पणी कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा लिखे गए एक संपादकीय का समर्थन करते हुए की।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि सोनिया गांधी ने अपने लेख में भारत से अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को दोबारा मजबूत करने, मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देने और गाजा में जारी संकट पर स्पष्ट और नैतिक रुख अपनाने की अपील की है।

राहुल गांधी ने इजरायल और गाजा मुद्दे पर सरकार को घेरा

राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा कि भारत की विदेश नीति में ऐसा बदलाव देखने को मिल रहा है, जिससे देश इजरायल के रणनीतिक प्रभाव के अधिक करीब पहुंचता जा रहा है। उनके अनुसार, यह समय ऐसा है जब दुनिया के कई देश इजरायल की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं और उससे दूरी बना रहे हैं, लेकिन भारत का रुख अलग दिखाई दे रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इजरायल दौरा भविष्य में विदेश नीति के लिहाज से एक महत्वपूर्ण और बहस का विषय बनने वाला फैसला माना जा सकता है। राहुल गांधी का कहना है कि भारत को हमेशा अपनी स्वतंत्र सोच और संतुलित विदेश नीति के लिए जाना जाता रहा है और उसी परंपरा को आगे बढ़ाने की जरूरत है।

उन्होंने गाजा में चल रहे मानवीय संकट का जिक्र करते हुए कहा कि वहां बड़ी संख्या में आम नागरिक और बच्चे हिंसा का शिकार हुए हैं। उनका मानना है कि भारत को मानवीय आधार पर अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए और फिलिस्तीनी लोगों के समर्थन में स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय मूल्यों और राष्ट्रवाद की भावना भी यही संदेश देती है कि निर्दोष लोगों के अधिकारों और जीवन की रक्षा के लिए आवाज उठाई जाए।

खरगे ने भी विदेश नीति को लेकर सरकार से पूछे सवाल

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी सोनिया गांधी के लेख का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि मौजूदा नीति के कारण भारत अपने कई पुराने और भरोसेमंद सहयोगी देशों से दूर होता नजर आ रहा है।

खरगे ने कहा कि फिलिस्तीन, ईरान और मध्य पूर्व के कई देशों के साथ भारत के लंबे समय से अच्छे संबंध रहे हैं, लेकिन वर्तमान विदेश नीति के चलते इन रिश्तों में पहले जैसी मजबूती दिखाई नहीं देती। उनका कहना है कि इससे भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि और वैश्विक स्तर पर उसकी पारंपरिक भूमिका भी प्रभावित हुई है।

उन्होंने यह भी कहा कि गाजा में जारी मानवीय संकट पर केंद्र सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। उनके अनुसार, जब बड़ी संख्या में निर्दोष नागरिक प्रभावित हो रहे हों, तब भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए अपनी स्पष्ट राय रखनी चाहिए।

सोनिया गांधी के लेख को लेकर बढ़ी राजनीतिक बहस

सोनिया गांधी के लेख के सार्वजनिक होने के बाद विदेश नीति को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। कांग्रेस का कहना है कि भारत को अपनी स्वतंत्र विदेश नीति, संतुलित कूटनीति और मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए। पार्टी का मानना है कि देश को किसी एक पक्ष के साथ पूरी तरह जुड़ने के बजाय सभी देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने चाहिए।

वहीं, इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ सरकार की ओर से तत्काल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, कांग्रेस लगातार यह दावा कर रही है कि वर्तमान विदेश नीति के कारण भारत अपनी पारंपरिक पहचान और वैश्विक संतुलन खो रहा है।

विदेश नीति, गाजा संकट और इजरायल-फिलिस्तीन विवाद को लेकर कांग्रेस के इन बयानों के बाद राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया है। आने वाले समय में संसद और राजनीतिक मंचों पर इस विषय पर और अधिक बहस होने की संभावना जताई जा रही है।

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