राज्यसभा चुनाव 2026: 24 सीटों पर चुनावी प्रक्रिया अंतिम चरण में, झारखंड और मिजोरम में मतदान से बढ़ी सियासी हलचल
नई दिल्ली, 18 जून 2026। राज्यसभा की 24 सीटों के लिए चल रही द्विवार्षिक चुनाव प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। देश के 10 राज्यों में खाली हुई इन सीटों में से अधिकांश पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने जा चुके हैं, जबकि झारखंड की दो और मिजोरम की एक सीट पर आज मतदान हो रहा है। इन चुनावों को संसद के उच्च सदन में राजनीतिक संतुलन तय करने वाला महत्वपूर्ण मुकाबला माना जा रहा है।
राजनीतिक दलों की नजर खासतौर पर झारखंड पर टिकी हुई है, जहां मुकाबला अपेक्षा से अधिक दिलचस्प हो गया है। वहीं मिजोरम में क्षेत्रीय दलों के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल रही है।
21 सीटों पर बिना मतदान तय हो चुके नतीजे
राज्यसभा चुनाव की 24 सीटों में से 21 सीटों पर उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन हो चुका है। कई राज्यों में उम्मीदवारों की संख्या उपलब्ध सीटों के बराबर रहने के कारण मतदान की जरूरत नहीं पड़ी।
गुजरात, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने मजबूत प्रदर्शन किया है। दूसरी ओर कांग्रेस ने कर्नाटक और कुछ अन्य राज्यों में अपनी मौजूदगी बनाए रखी है। शुरुआती तस्वीर में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को स्पष्ट बढ़त मिलती दिखाई दे रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन परिणामों से आने वाले समय में राज्यसभा में NDA की स्थिति और मजबूत हो सकती है।
झारखंड में मुकाबले ने बढ़ाई राजनीतिक दिलचस्पी
झारखंड की दो सीटों पर मतदान होने के कारण पूरे देश की नजर यहां के चुनाव पर है। सत्तारूढ़ गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद विपक्ष ने मुकाबले को रोचक बना दिया है।
राज्य में एक तरफ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस का गठबंधन है, जबकि दूसरी ओर भाजपा समर्थित उम्मीदवार मैदान में हैं। राजनीतिक गलियारों में क्रॉस वोटिंग की संभावनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
मतदान के दौरान विधानसभा परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। सभी दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटे हुए हैं।
मिजोरम में क्षेत्रीय राजनीति का अहम इम्तिहान
मिजोरम की एकमात्र राज्यसभा सीट पर सत्तारूढ़ ZPM और विपक्षी MNF के बीच सीधा मुकाबला हो रहा है। राज्य की राजनीति राष्ट्रीय दलों से अलग स्थानीय मुद्दों के इर्द-गिर्द घूमती है।
विकास, प्रशासनिक सुधार और केंद्र-राज्य संबंध जैसे मुद्दे चुनावी चर्चा के केंद्र में हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह चुनाव राज्य की भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
राज्यसभा चुनाव क्यों होते हैं महत्वपूर्ण?
राज्यसभा भारतीय संसद का उच्च सदन है और यहां राज्यों का प्रतिनिधित्व होता है। लोकसभा में बहुमत होने के बावजूद किसी भी सरकार के लिए राज्यसभा में पर्याप्त संख्या होना जरूरी माना जाता है।
कई महत्वपूर्ण विधेयक, संवैधानिक संशोधन और नीतिगत फैसले राज्यसभा की मंजूरी के बिना आगे नहीं बढ़ सकते। यही कारण है कि हर राज्यसभा चुनाव राष्ट्रीय राजनीति के लिए विशेष महत्व रखता है।
NDA और विपक्ष के लिए क्या हैं संकेत?
2024 के लोकसभा चुनावों के बाद भाजपा के नेतृत्व वाला NDA लगातार अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। राज्यसभा चुनावों के शुरुआती परिणाम इस रणनीति को सफल होते दिखा रहे हैं।
वहीं विपक्षी दलों के लिए यह चुनाव एकजुटता और संगठनात्मक क्षमता की परीक्षा माना जा रहा है। झारखंड जैसे राज्यों के नतीजे आने वाले समय की राजनीतिक दिशा का संकेत दे सकते हैं।
शाम तक साफ होगी तस्वीर
झारखंड और मिजोरम में मतदान पूरा होने के बाद शाम को मतगणना की जाएगी। इसके साथ ही राज्यसभा चुनाव 2026 की पूरी तस्वीर सामने आ जाएगी। राजनीतिक दलों के साथ-साथ देशभर के राजनीतिक विश्लेषक भी इन नतीजों का इंतजार कर रहे हैं।
राज्यसभा की कुल 24 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव प्रक्रिया आयोजित की गई है।
झारखंड की दो और मिजोरम की एक सीट पर मतदान कराया जा रहा है।
क्योंकि कई राज्यों में उम्मीदवारों की संख्या उपलब्ध सीटों के बराबर थी, इसलिए उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।
राज्यसभा चुनाव में संबंधित राज्य की विधानसभा के निर्वाचित विधायक मतदान करते हैं।
राज्यसभा में पर्याप्त संख्या बल होने से सरकार को महत्वपूर्ण विधेयक और नीतिगत फैसले पारित कराने में आसानी होती है।

