अमेरिका-ईरान शांति डील: ट्रंप और पेज़ेशकियान के समझौते से होर्मुज स्ट्रेट खुला, तेल कीमतों में गिरावट
वाशिंगटन/तेहरान, 18 जून 2026 – अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव अब एक बड़े कूटनीतिक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने फ्रांस के वर्साय पैलेस में एक ऐतिहासिक शांति समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस 14-पॉइंट समझौते के बाद मध्य पूर्व में संघर्ष कम होने और वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता की उम्मीद बढ़ गई है।
होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुला, तनाव में बड़ी राहत
समझौते के तहत दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल दिया गया है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा संभालता है।
अमेरिका ने अपनी नौसैनिक पाबंदियां हटाने का निर्णय लिया है, जबकि ईरान ने टोल-फ्री शिपिंग की गारंटी दी है। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
60 दिन का अस्थायी सीजफायर और परमाणु कार्यक्रम पर रोक
इस समझौते के तहत 60 दिनों का अस्थायी सीजफायर लागू किया गया है। इस दौरान दोनों देश स्थायी समाधान के लिए बातचीत करेंगे।
मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अस्थायी रोक और निगरानी
- यूरेनियम संवर्धन (enrichment) पर आगामी वार्ता
- क्षेत्रीय संघर्षों को कम करने की दिशा में सहयोग
- प्रतिबंधों में आंशिक ढील और फंसी संपत्तियों की रिहाई
- पुनर्निर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय फंड पर सहमति
वैश्विक तेल बाजार पर असर
समझौते की घोषणा के तुरंत बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 5% की गिरावट दर्ज की गई और यह करीब 80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट के खुलने से सप्लाई चेन सामान्य होगी, जिससे महंगाई पर भी नियंत्रण संभव है।
मध्यस्थ देशों की अहम भूमिका
इस पूरे समझौते में पाकिस्तान, कतर और स्विट्जरलैंड की मध्यस्थता को अहम माना जा रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने इसे क्षेत्रीय शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
वहीं, G7 देशों ने भी इस डिप्लोमैटिक प्रगति का स्वागत किया है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
- इजराइल ने इस समझौते पर चिंता जताते हुए इसे “जोखिमपूर्ण” बताया है
- रूस और चीन ने समझौते का समर्थन करते हुए पूर्ण परमाणु समझौते की मांग की है
- यूरोपीय देशों ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता के लिए सकारात्मक कदम माना है
- भारत ने शांति प्रयासों का समर्थन करते हुए ऊर्जा कीमतों में राहत की उम्मीद जताई है
समझौते का रणनीतिक महत्व
यह डील न केवल मध्य पूर्व की राजनीति बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रतिबंधों में ढील से ईरान की अर्थव्यवस्था को राहत मिलेगी, जबकि अमेरिका को क्षेत्र में अपनी कूटनीतिक स्थिति मजबूत करने का अवसर मिलेगा।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अभी भी स्पष्टता बाकी है।
आगे की राह
अगले 60 दिनों में दोनों देशों के बीच स्थायी शांति समझौते को लेकर बातचीत जारी रहेगी। यदि यह प्रयास सफल होता है, तो यह समझौता मध्य पूर्व में दशकों बाद सबसे बड़ी कूटनीतिक सफलता साबित हो सकता है।
यह एक 14-पॉइंट MoU है जिसमें दोनों देशों ने अस्थायी सीजफायर और तनाव कम करने पर सहमति जताई है।
यह दुनिया के 20% तेल व्यापार का प्रमुख समुद्री मार्ग है, जिसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित होता है।
समझौते के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 5% की गिरावट दर्ज की गई।
अभी यह 60 दिनों का अस्थायी सीजफायर है, जिसके बाद स्थायी समझौते पर बातचीत होगी।
इसमें पाकिस्तान, कतर और स्विट्जरलैंड ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई है।

