ऑपरेशन सिंदूर पर शशि थरूर का बड़ा बयान – आतंकियों को जवाब देना जरूरी था
भारत द्वारा “ऑपरेशन सिंदूर” की शुरुआत के बाद अब देश की ओर से एक अंतरराष्ट्रीय डेलिगेशन को विभिन्न देशों में भेजा गया है, जिसका उद्देश्य दुनिया को भारत के रुख और आतंकवाद के खिलाफ उसके कदमों से अवगत कराना है। इस डेलिगेशन का हिस्सा कांग्रेस नेता और वरिष्ठ सांसद शशि थरूर भी हैं। वे इस समय अमेरिका के दौरे पर हैं और उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले का ज़िक्र करते हुए बताया कि ऑपरेशन सिंदूर क्यों समय की मांग बन गया था।
पहलगाम हमले ने झकझोर दिया
शशि थरूर ने बताया कि पहलगाम में हुआ आतंकी हमला बेहद दर्दनाक था, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई। इस हमले में आतंकियों ने न सिर्फ लोगों को बेरहमी से मारा, बल्कि पीड़ितों के परिवारों को भी गहरा मानसिक आघात पहुंचाया। उन्होंने बताया कि कैसे आतंकवादियों ने लोगों को उनके परिवार के सामने मारा और पत्नियों से कहा कि जाकर यह सब दुनिया को बताओ। इस बर्बरता को देख और सुनकर ही भारत सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर का निर्णय लिया।
थरूर ने कहा, “हमने पीड़ितों की चीखें सुनी थीं। हमें लगा कि अब चुप रहना और सहना सही नहीं होगा। हमने तय किया कि अब महिलाओं की मांग के सिंदूर को आतंकियों के खून से रंगा जाएगा।” इस भावुक बयान के जरिए थरूर ने ऑपरेशन सिंदूर की आवश्यकता और उसके पीछे की भावना को स्पष्ट किया।
ऑपरेशन सिंदूर पर उठे सवालों का जवाब
गौरतलब है कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर विपक्ष, खासकर कांग्रेस पार्टी के कुछ नेताओं ने सवाल उठाए थे। राहुल गांधी ने भी इसकी पारदर्शिता और मकसद पर सवाल खड़े किए थे। लेकिन अब शशि थरूर ने खुद आगे आकर ऑपरेशन का समर्थन किया है, जिससे पार्टी के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद उजागर हो गए हैं।
थरूर ने स्पष्ट किया कि यह कोई राजनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि एक ज़रूरी और ठोस कार्रवाई थी, जो निर्दोष नागरिकों की रक्षा और आतंकियों को करारा जवाब देने के लिए जरूरी थी।
पनामा में भारतीय समुदाय को किया संबोधित
शशि थरूर ने अपने दौरे के दौरान पनामा में भारतीय प्रवासी समुदाय को संबोधित करते हुए आतंकवाद के खिलाफ भारत के रुख को मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि भारत पिछले कई दशकों से आतंकवाद का सामना कर रहा है, लेकिन अब समय आ गया है कि इसका निर्णायक जवाब दिया जाए।
उन्होंने 26/11 मुंबई हमले का भी जिक्र किया, जहां एक आतंकी अजमल कसाब को जिंदा पकड़ा गया था। थरूर ने कहा कि कसाब ने खुद कबूला था कि वह पाकिस्तान से आया था और पाकिस्तान की सेना व खुफिया एजेंसियां इस हमले में शामिल थीं। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ही नहीं, बल्कि विदेशी खुफिया एजेंसियों के पास भी इसके सबूत हैं।
भारत का जवाब – आतंक के अड्डों पर सीधा हमला
पहलगाम हमले के बाद भारत ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और पाकिस्तान और पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) में स्थित 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर उन्हें तबाह कर दिया। यह कार्रवाई तेज और सटीक थी। इसके बाद पाकिस्तानी सेना ने भी जवाबी हमला करने की कोशिश की और भारत के कई शहरों को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाने का प्रयास किया। हालांकि भारतीय वायुसेना और थलसेना ने उनकी सारी कोशिशें नाकाम कर दीं।
भारत अब आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति में कोई नरमी नहीं बरत रहा है। ऑपरेशन सिंदूर सिर्फ एक सैन्य प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक संदेश है कि भारत अब अपने नागरिकों की सुरक्षा से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। शशि थरूर का बयान इस ऑपरेशन को वैधता और नैतिक समर्थन देता है, जो यह दिखाता है कि आतंक के खिलाफ देश एकजुट है — चाहे वह किसी भी राजनीतिक दल का नेता क्यों न हो।
