शरद पवार ने दिया एनसीपी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा, कौन होगा एनसीपी का नया अध्यक्ष
एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार का एक चौकाने वाला फैसला आज मंगलवार को आया उन्होंने ऐलान किया कि वे एनसीपी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रहे हैं। उनके इस फैसले से राजनीति गलियारों में हलचल मच गयी। इसके बाद से ही यह खबर उड़ने लगी कि अब एनसीपी का न्य अध्यक्ष कौन होगा।
दरअसल आज मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान शरद पवार ने अपने इस्तीफे का ऐलान किया। शरद पवार ने पार्टी के कार्यकर्ताओं से कहा कि मैं हमेशा उनके साथ रहूंगा। लेकिन अब एनसीपी के अध्यक्ष के तौर पर नहीं। शरद पवार ने अपने इस्तीफे का तो ऐलान कर दिया लेकिन अपने उत्तराधिकारी का ऐलान नहीं किया। इससे चारों तरफ यह हलचल मची हुयी है कि शरद पवार के बाद पार्टी का अध्यक्ष कोण होगा। इस लिस्ट में दो नाम सबसे ऊपर आ रहे है। उसमे से एक नाम तो उनकी बेटी सुप्रिया सुले और दूसरा नाम उनके भतीजे अजीत पवार का है। हालांकि कुछ और नाम भी सामने आ रहे है उनमे छगन भुजवल, जयंत पाटिल और प्रफुल्ल पटेल का नाम भी एनसीपी के अगले अध्यक्ष पद के लिए लिया जा रहा है।
शरद पवार का राजनैतिक सफर
शरद पवार को राजनीति का चाड़क्य कहा जाता था। शरद पवार महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि देश के बड़े नेताओं में से एक हैं। उनका राजनैतिक सफर 50 साल से भी ज्यादा का रहा है। वे मात्र 27 साल की उम्र में विधायक बन गए थे।
शरद पवार का जन्म पुणे के बारामती में 12 दिसंबर 1940 हुआ था। उनके पिता एक कॉपरेटिव सोसाइटी में वरिष्ठ पद पर थे। उनकी माँ ने निकाय चुनाव भी लड़ा था। शरद पवार की शादी पूर्व क्रिकेटर सदाशिव शिंदे की बेटी प्रतिभा से हुयी थी। शरद पवार ने सन 1967 से अपने राजनैतिक सफर की शुरुआत की। उन्होंने अपना पहला चुनाव बारामती सीट से लड़ा। बारामती सीट पर वे 1967 से 1990 तक लगातार काबिज रहे। उसके बाद यह सीट उनके भतीजे अजित पवार के पास है। इसी बारामती सीट से बेटी सुप्रिया सुले 2009 में सांसद हुयी। इसके बाद से शरद पवार राजनीति में बुलंदियों को छूते चले गए।
आपातकाल के दौरान इंदिरा गाँधी से की थी बगावत
जिस समय इंदिरा गाँधी ने देश में आपातकाल लगाया था उस समय शरद पवार ने इंदिरा गाँधी से बगावत कर दी और उसके बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी को छोड़ दिया। साल 1978 में जनता पार्टी के साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार बनायीं। और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने। साल 1980 में जब इंदिरा गाँधी की सरकार वापिस आयी तो उनकी सरकार को बर्खास्त कर दिया गया। उसके बाद साल 1983 में शरद पवार ने कांग्रेस पार्टी सोशलिस्ट का गठन किया। उस साल हुए लोकसभा चुनावों में शरद पवार बारामती से पहली बार सांसद का चुनाव जीते। लेकिन 1985 में हुए विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को 54 सीटें मिली। जिसकी वजह से उन्हें लोकसभा से इस्तीफा देकर वापिस प्रदेश की राजनीती में आना पड़ा। फिर उन्होंने विधानसभा में विपक्ष का नेतृत्व किया।
साल 1987 में फिर से आये कांग्रेस में
साल 1987 में फिर से अपनी पुराणी पार्टी में वापिस आ गए। उस समय राजीव गाँधी देश के प्रधानमंत्री थे। उन दिनों पवार राजीव गाँधी के बहुत करीबी थे। 1988 में शरद पवार को शंकर राव चव्हाण की जगह सीएम की कुर्सी मिली। चव्हाण को केंद्र में वित्तमंत्री बना दिया गया था।
पीएम पद के लिए भी उम्मीदवार बने
बात 1991 की है जब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की हत्या हो गयी थी। देश में अलग ही प्रकार की स्थिति बन गयी थी। उस समय शरद पवार का नाम देश के पीएम पद लिए उन तीन उम्मीदवारों में शामिल था। इनके अलावा नारायणदत्त तिवारी और पी वी नरसिम्हा राव का नाम शामिल था। नारायण दत्त तिवारी 1991 के लोकसभा चुनाव में अप्रत्याशित हार के बाद पी वी नरसिम्हा राव को देश का प्रधानमंत्री बनाया गया और शरद पवार को रक्षा मंत्री बनाया गया।
बीसीसीआई के अध्यक्ष भी रहे
शरद पवार भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के अध्यक्ष भी रहे। 2005 से 2008 तक बीसीसीआई के चेयरमैन भी रहे। 2010 आईसीसी के अध्यक्ष भी रहे।

