छत्तीसगढ़ में सुप्रिया श्रीनेत और नेहा सिंह राठौर पर FIR, पुराने वीडियो से विवाद
छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता दिवस से जुड़े एक वायरल वीडियो को लेकर राजनीतिक विवाद पुलिस तक पहुंच गया है। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नेहा सिंह राठौर समेत अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। शिकायत में आरोप है कि BJP विधायक अजय चंद्राकर का पुराना वीडियो 15 अगस्त का बताकर सोशल मीडिया पर साझा किया गया, जिससे भ्रम और तनाव की स्थिति पैदा हो सकती थी।
क्या है पूरा मामला?
मामला छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के कुरूद विधानसभा क्षेत्र से जुड़ा है। यहां के BJP विधायक और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर का एक वीडियो 15 अगस्त को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें वह BJP का झंडा फहराते हुए दिखाई दे रहे थे। पोस्ट के जरिए यह दावा किया गया कि वीडियो स्वतंत्रता दिवस के दिन का है और उस दिन राष्ट्रीय ध्वज की जगह BJP का झंडा फहराया गया।
इसके बाद BJP की ओर से इस पोस्ट को लेकर आपत्ति जताई गई। पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता उज्ज्वल दीपक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि वीडियो पुराना है और इसे गलत संदर्भ के साथ साझा किया गया।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर सुप्रिया श्रीनेत, नेहा सिंह राठौर और एक सोशल मीडिया अकाउंट के खिलाफ मामला दर्ज किया है। मामले में भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 336(4), 353(2) और 196 के तहत कार्रवाई की गई है।
पुराना वीडियो कब का बताया जा रहा है?
शिकायतकर्ता BJP नेता उज्ज्वल दीपक के मुताबिक, वायरल वीडियो स्वतंत्रता दिवस का नहीं है। उनके अनुसार यह वीडियो 22 मार्च 2026 को आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान से जुड़ा है।
यानी जिस वीडियो को 15 अगस्त के संदर्भ में शेयर किया गया, वह कथित तौर पर करीब पांच महीने पुरानी घटना का है। इसी अंतर को लेकर पूरा विवाद खड़ा हुआ है।
BJP विधायक अजय चंद्राकर की ओर से भी स्वतंत्रता दिवस के दिन तिरंगा फहराने से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जाने की बात सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने स्पष्ट किया कि वायरल BJP झंडे वाला वीडियो स्वतंत्रता दिवस का नहीं था।
हालांकि, सोशल मीडिया पोस्ट में वीडियो किस संदर्भ में और किस जानकारी के आधार पर साझा किया गया, यह जांच का विषय है। FIR दर्ज होना आरोपों की शुरुआत है और मामले के तथ्यों का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया में होगा।
सुप्रिया श्रीनेत ने क्या पोस्ट किया था?
रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस की सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से जुड़ी नेता सुप्रिया श्रीनेत ने 15 अगस्त की रात एक्स पर यह वीडियो साझा किया था। पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्वतंत्रता दिवस पर BJP के लोगों ने तिरंगे की जगह पार्टी का झंडा फहराया।
उन्होंने इस घटना को लेकर BJP पर राजनीतिक टिप्पणी भी की थी। पोस्ट में उन्होंने BJP और उसके वैचारिक इतिहास पर सवाल उठाते हुए राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान से जुड़ा आरोप लगाया।
बाद में BJP की ओर से दावा किया गया कि पोस्ट में इस्तेमाल वीडियो स्वतंत्रता दिवस का नहीं था। इसी के बाद पुलिस शिकायत और FIR का मामला सामने आया।
नेहा सिंह राठौर पर भी कार्रवाई क्यों?
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर नेहा सिंह राठौर का नाम भी इस मामले में FIR में शामिल है। आरोप है कि उन्होंने भी इसी वायरल सामग्री को स्वतंत्रता दिवस के संदर्भ में सोशल मीडिया पर साझा किया था।
नेहा सिंह राठौर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर सोशल मीडिया के जरिए अपनी टिप्पणियों के लिए जानी जाती हैं। इस मामले में पुलिस यह जांच कर रही है कि संबंधित वीडियो और तस्वीरें उनके सोशल मीडिया अकाउंट तक किस स्रोत से पहुंचीं और उन्हें किस संदर्भ में साझा किया गया।
यह भी जांच का हिस्सा होगा कि पोस्ट करने वालों को वीडियो के पुराने होने की जानकारी थी या नहीं।
BJP नेता ने पुलिस में क्या शिकायत की?
BJP प्रदेश प्रवक्ता उज्ज्वल दीपक ने 17 अगस्त को साइबर क्राइम और सिविल लाइन पुलिस से लिखित शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि पुराने वीडियो और तस्वीरों को स्वतंत्रता दिवस से जोड़कर प्रस्तुत किया गया।
शिकायतकर्ता ने दावा किया कि इस तरह की पोस्ट से लोगों के बीच भ्रम पैदा हो सकता है और BJP नेताओं तथा जनप्रतिनिधियों की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया।
उन्होंने पुलिस से सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो, तस्वीरों और संबंधित डिजिटल सामग्री की तकनीकी जांच कराने की मांग भी की। साथ ही मूल स्रोत और पोस्ट के डिजिटल ट्रेल की जांच की मांग सामने आई है।
किन धाराओं में दर्ज हुई FIR?
पुलिस ने इस मामले में BNS की तीन धाराओं के तहत FIR दर्ज की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ये धाराएं धारा 336(4), 353(2) और 196 हैं।
इन धाराओं के तहत दर्ज मामला सोशल मीडिया पर कथित रूप से गलत या भ्रामक सामग्री प्रसारित करने और उससे सार्वजनिक व्यवस्था या विभिन्न समूहों के बीच तनाव की आशंका से जुड़ा बताया गया है।
पुलिस की कार्रवाई शिकायत और प्रारंभिक जांच के आधार पर हुई है। अब जांच के दौरान डिजिटल सामग्री की सत्यता, उसका मूल संदर्भ और पोस्ट करने वालों की भूमिका जैसे पहलुओं को देखा जाएगा।
रायपुर में भी दर्ज हुई शिकायत
इस विवाद में रायपुर के सिविल लाइंस थाने में भी शिकायत दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। BJP प्रवक्ता उज्ज्वल दीपक की शिकायत पर वहां शून्य FIR दर्ज की गई, जिसे आगे की जांच के लिए धमतरी सिटी कोतवाली भेज दिया गया क्योंकि इसी मामले से संबंधित प्राथमिकी वहां पहले से दर्ज थी।
शून्य FIR का इस्तेमाल ऐसे मामलों में किया जाता है जहां शुरुआती स्तर पर किसी भी पुलिस थाने में शिकायत दर्ज की जा सकती है और बाद में संबंधित क्षेत्र के थाने को मामला भेजा जाता है।
इस मामले में धमतरी का संबंध इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वायरल वीडियो में दिखाई देने वाली घटना कुरूद क्षेत्र की बताई जा रही है।
सोशल मीडिया पोस्ट की जांच कैसे होगी?
पुलिस की जांच का एक अहम हिस्सा वायरल वीडियो और तस्वीरों का वास्तविक स्रोत पता करना होगा। इसके लिए पोस्ट का समय, मूल अपलोड, शेयर करने की प्रक्रिया और उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है।
जांच में यह भी देखा जाएगा कि वीडियो वास्तव में कब रिकॉर्ड हुआ था और क्या उसमें मौजूद घटनास्थल तथा कार्यक्रम की पहचान पुराने रिकॉर्ड से मिलती है।
इसके अलावा पुलिस यह भी देख सकती है कि पोस्ट को स्वतंत्रता दिवस से जोड़ने का आधार क्या था और क्या पोस्ट करने वाले लोगों को वीडियो के पुराने होने की जानकारी थी।
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर विवाद क्यों बढ़ा?
15 अगस्त देश के लिए बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसर है। इस दिन राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्र से जुड़े प्रतीकों को लेकर सोशल मीडिया पर किसी भी दावे का राजनीतिक और सामाजिक असर तेजी से हो सकता है।
यही वजह है कि किसी पुराने वीडियो को नए संदर्भ में शेयर करने का आरोप विवाद का कारण बन गया। एक तरफ BJP ने इसे भ्रामक प्रचार बताते हुए पुलिस कार्रवाई की मांग की, वहीं दूसरी तरफ यह मामला कांग्रेस और BJP के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का विषय बन गया है।
ऐसे मामलों में वीडियो की तारीख और वास्तविक संदर्भ की पुष्टि किए बिना उसे साझा करने से गलत सूचना तेजी से फैल सकती है।
क्या वीडियो को फर्जी बताया गया है?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार विवाद इस बात पर है कि वीडियो पुराना है और उसे स्वतंत्रता दिवस की घटना के रूप में पेश किया गया। यानी पुलिस शिकायत का मुख्य आधार वीडियो का कथित गलत संदर्भ है।
वीडियो में BJP विधायक अजय चंद्राकर के BJP का झंडा फहराने की तस्वीरें दिखाई देती हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह वास्तविक वीडियो है, लेकिन स्वतंत्रता दिवस का नहीं है।
इसलिए मामले की जांच में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि वीडियो कब का है और उसे किस संदर्भ में सोशल मीडिया पर साझा किया गया।
BJP और कांग्रेस के बीच बढ़ा राजनीतिक विवाद
घटना के बाद मामला केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। सोशल मीडिया पर दोनों राजनीतिक दलों के समर्थकों और नेताओं की ओर से इस मुद्दे पर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
BJP का आरोप है कि पुराने वीडियो को स्वतंत्रता दिवस से जोड़कर पार्टी और उसके नेताओं की छवि खराब करने की कोशिश की गई। दूसरी ओर, मामले में आरोपी बनाए गए लोगों की ओर से इस FIR पर आगे क्या प्रतिक्रिया आती है, यह महत्वपूर्ण होगा।
फिलहाल पुलिस जांच के निष्कर्ष आने तक किसी पक्ष के आरोप को अंतिम तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
FIR के बाद क्या होगा?
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस अब मामले की विस्तृत जांच करेगी। जांच में सोशल मीडिया पोस्ट के डिजिटल रिकॉर्ड, वीडियो का मूल स्रोत, उसके अपलोड और शेयर किए जाने का समय तथा संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की जा सकती है।
यदि जांच में आरोपों की पुष्टि करने वाले पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई कर सकती है। वहीं यदि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सामग्री नहीं मिलती है तो जांच के निष्कर्ष उसके अनुसार सामने आएंगे।
इसलिए फिलहाल FIR को कानूनी प्रक्रिया की शुरुआत के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि किसी आरोपी के खिलाफ आरोप सिद्ध होने के रूप में।
सोशल मीडिया पर फैली सामग्री से सबक
इस पूरे मामले ने एक बार फिर सोशल मीडिया पर किसी भी वीडियो को साझा करने से पहले उसके स्रोत और तारीख की पुष्टि करने की जरूरत को सामने रखा है।
पुराने वीडियो अक्सर नए घटनाक्रम के साथ जोड़कर वायरल कर दिए जाते हैं। इससे लोगों के बीच गलतफहमी पैदा होने के साथ राजनीतिक या सामाजिक विवाद भी बढ़ सकता है।
विशेष रूप से राष्ट्रीय पर्व, धार्मिक आयोजनों या संवेदनशील घटनाओं से जुड़े वीडियो को साझा करते समय उसके मूल संदर्भ की जांच करना बेहद जरूरी है।
निष्कर्ष
छत्तीसगढ़ में सुप्रिया श्रीनेत और नेहा सिंह राठौर समेत अन्य के खिलाफ दर्ज FIR एक पुराने BJP झंडा फहराने वाले वीडियो को स्वतंत्रता दिवस से जोड़कर सोशल मीडिया पर साझा करने के आरोप से जुड़ी है। BJP की शिकायत के अनुसार यह वीडियो 22 मार्च 2026 के कार्यक्रम का है, जबकि 15 अगस्त को इसे स्वतंत्रता दिवस की घटना के रूप में पेश किया गया।
पुलिस ने BNS की धारा 336(4), 353(2) और 196 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब जांच में वीडियो का वास्तविक समय, उसका मूल स्रोत, सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने का संदर्भ और संबंधित लोगों की भूमिका स्पष्ट होगी।
फिलहाल यह मामला राजनीतिक विवाद के साथ-साथ सोशल मीडिया पर गलत संदर्भ में पुरानी सामग्री साझा किए जाने की गंभीरता को भी सामने लाता है। FIR दर्ज होना आरोपों की कानूनी जांच की शुरुआत है और अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

