नेपाल बाढ़ में 1000 से ज्यादा मौतें, 163 भारतीय रेस्क्यू; बचाव अभियान जारी
नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने बड़े मानवीय संकट का रूप ले लिया है। नेपाल बाढ़ में मौतों का आंकड़ा 1000 पार पहुंच चुका है और हजारों लोग अब भी लापता हैं।
भारत भी राहत और बचाव अभियान में जुटा है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक अब तक 163 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जबकि भारतीय विशेषज्ञ टीमें नेपाल में बचाव और पहचान के काम में मदद कर रही हैं।
नेपाल बाढ़ में मौतों का आंकड़ा 1000 पार
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, मंगलवार तक मृतकों की संख्या 1003 पहुंच गई थी। करीब 3916 लोग अब भी लापता बताए गए थे।
बाढ़ का असर नेपाल के कई हिस्सों में हुआ है। सड़कें, पुल, मकान और बिजली से जुड़ा बुनियादी ढांचा बड़े स्तर पर क्षतिग्रस्त हुआ है। कई दूरदराज के इलाकों का संपर्क टूटने से राहत और बचाव दलों के लिए वहां पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
ताजा रिपोर्टों में बुधवार को नेपाल और तिब्बत में कुल मौतों का आंकड़ा 1000 से भी ऊपर बताया गया है। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़े लगातार बदल रहे हैं, क्योंकि प्रभावित क्षेत्रों से शव बरामद होने और पहचान की प्रक्रिया जारी है।
हजारों लोग अब भी लापता
नेपाल में करीब 4000 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। राहत एजेंसियां लगातार मलबे और बाढ़ प्रभावित इलाकों में तलाशी अभियान चला रही हैं।
कई लोग बाढ़ के तेज बहाव में बह गए, जबकि कुछ के मलबे में दबे होने की आशंका है। खासकर जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालना बचाव दलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
भारतीय नागरिकों का रेस्क्यू अभियान जारी
नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए भारत सरकार लगातार नेपाल के अधिकारियों के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 163 भारतीय नागरिकों को रेस्क्यू किया जा चुका है।
भारतीय बचाव दल नेपाल में स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद भारतीय टीमों ने प्रभावित इलाकों तक पहुंचने के लिए विशेष तकनीक और उपकरणों का इस्तेमाल किया है।
भारत की ओर से राहत और बचाव प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए एक और विमान नेपाल भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है। इसमें 11 सदस्यीय बचाव टीम शामिल है।
भारतीय टनल रेस्क्यू टीम भी सक्रिय
बाढ़ से प्रभावित जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। ऐसे इलाकों में काम करने के लिए भारत की विशेष टनल रेस्क्यू टीम तैनात है।
भारतीय टीम को चिलिमे क्षेत्र की जलविद्युत सुरंगों में पहुंचने के दौरान कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। सुरंगों में जगह कम है और फर्श पर कीचड़ जमा है। इसके बावजूद टीम अंदर तक पहुंचकर संभावित जीवित लोगों की तलाश कर रही है।
बाढ़ की वजह क्या बनी?
नेपाल में मौजूदा आपदा की शुरुआत 26 अगस्त को हुई। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने की घटना के बाद बड़ी मात्रा में पानी, मलबा और पत्थर निचले इलाकों की ओर बह निकले। इससे अचानक आई बाढ़ ने कई घाटियों और बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया।
तेज बहाव के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा। कई स्थानों पर पुल और सड़कें बह गईं। इससे प्रभावित इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाना भी मुश्किल हो गया।
वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियल बाढ़ के बढ़ते खतरे को लेकर चिंता जताई है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़े अधिकारियों ने भी जलवायु परिवर्तन के कारण इस तरह की घटनाओं के जोखिम बढ़ने की चेतावनी दी है।
जलविद्युत परियोजनाओं में फंसे सैकड़ों लोग
नेपाल बाढ़ से कई जलविद्युत परियोजनाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। करीब 12 परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने और बड़ी संख्या में कर्मचारियों के लापता होने की जानकारी सामने आई है।
कई कर्मचारी सुरंगों के अंदर फंसे होने की आशंका है। कुछ स्थानों पर सुरंगों में पानी और कीचड़ भर गया है। रास्ते बंद होने के कारण बचाव दलों को भारी मशीनों और खुदाई उपकरणों की मदद लेनी पड़ रही है।
रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय, चीनी और नेपाली विशेष बचाव दल मिलकर इन क्षेत्रों में अभियान चला रहे हैं। कुछ सुरंगों से करीब 300 लोगों को बाहर निकालने की जानकारी भी सामने आई है।
रेस्क्यू अभियान में हेलिकॉप्टर और भारी मशीनों का इस्तेमाल
दूरदराज के प्रभावित इलाकों में सड़क संपर्क टूटने के कारण हेलिकॉप्टरों की मदद ली जा रही है। हेलिकॉप्टरों के जरिए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ राहत सामग्री भी पहुंचाई जा रही है।
जहां सड़क मार्ग से पहुंचना संभव है, वहां खुदाई करने वाली मशीनों का इस्तेमाल मलबा हटाने में किया जा रहा है। कई स्थानों पर अस्थायी पुल बनाकर भी संपर्क बहाल करने की कोशिश हो रही है।
नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह के अनुसार, देशभर में 11 हजार से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका था। सुरक्षा बलों की बड़ी संख्या को राहत और बचाव अभियान में लगाया गया है।
विदेशी नागरिक भी प्रभावित
नेपाल बाढ़ में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। लापता लोगों में 30 से ज्यादा देशों के नागरिक शामिल हैं। नेपाल की आपदा प्राधिकरण की रिपोर्ट में 583 विदेशी नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी गई थी।
भारत सहित कई देशों ने अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए नेपाल सरकार के साथ समन्वय बढ़ाया है। भारतीय अधिकारियों की ओर से लगातार नागरिकों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
विदेशी नागरिकों की पहचान और शवों की पहचान में भी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। भारत की 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम नेपाल में डीएनए जांच और पहचान प्रक्रिया में सहयोग कर रही है।
राहत कार्यों के सामने बड़ी चुनौतियां
नेपाल बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान कई मुश्किलों के बीच चल रहा है। सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित इलाकों तक पहुंचने की है। सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण कई क्षेत्रों में सामान्य यातायात अभी भी बाधित है।
इसके अलावा मलबे की बड़ी मात्रा भी राहत कार्य में बाधा बन रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, आपदा के बाद करीब 22 लाख टन मलबा जमा हुआ है।
बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों में अस्थिर जमीन के कारण बचाव दलों को भी सावधानी बरतनी पड़ रही है। कुछ इलाकों में खराब मौसम के कारण अभियान को अस्थायी रूप से रोकना भी पड़ा है।
भारत की मदद से बढ़ी राहत की उम्मीद
भारत ने नेपाल में राहत और बचाव अभियान में तकनीकी और मानवीय मदद बढ़ाई है। भारतीय नागरिकों को निकालने के अलावा भारतीय विशेषज्ञ नेपाल के बचाव अभियानों में भी योगदान दे रहे हैं।
फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से मृतकों की पहचान का काम आगे बढ़ाया जा रहा है। वहीं टनल रेस्क्यू टीम मुश्किल सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के प्रयास में जुटी है।
भारत की ओर से लगातार अतिरिक्त सहायता भेजे जाने से प्रभावित क्षेत्रों में राहत अभियान को गति मिलने की उम्मीद है। हालांकि, आपदा का स्तर इतना बड़ा है कि सामान्य स्थिति बहाल करने में लंबा समय लग सकता है।
आगे की चुनौती राहत से पुनर्वास तक
नेपाल के सामने अब केवल लोगों को बचाने की चुनौती नहीं है। हजारों परिवारों के घर और आजीविका के साधन प्रभावित हुए हैं। सड़क, पुल, बिजली और दूसरी जरूरी सुविधाओं को दोबारा तैयार करना भी बड़ी चुनौती होगी।
बाढ़ के बाद स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ सकते हैं। दूषित पानी, साफ-सफाई की कमी और राहत शिविरों में भीड़ से संक्रमण का खतरा पैदा हो सकता है। ऐसे में राहत सामग्री के साथ स्वच्छ पानी और चिकित्सा सुविधाओं की जरूरत भी बढ़ेगी।
निष्कर्ष
नेपाल बाढ़ ने देश के सामने बेहद गंभीर मानवीय संकट खड़ा कर दिया है। मौतों का आंकड़ा 1000 पार पहुंच चुका है और करीब 4000 लोग अब भी लापता हैं। जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए नेपाल, भारत और अन्य देशों की टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं।
भारत के लिए अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी प्राथमिकता बनी हुई है। अब तक 163 भारतीय नागरिकों को रेस्क्यू किया जा चुका है और बचाव अभियान जारी है। आने वाले दिनों में लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करना नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी।

