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SCO समिट में पीएम मोदी की बड़ी बैठकें, पुतिन-शी से मुलाकात; आतंकवाद पर सख्त संदेश

SCO समिट 2024 में पीएम मोदी, व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग की मुलाकात का न्यूज़ ग्राफिक - न्यूज़ क्रिटिक

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित 26वें SCO समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का रुख मजबूती से रखा। उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात भी की।
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मापदंड खत्म करने और उसके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को किसी भी देश की रणनीतिक नीति का साधन नहीं बनने दिया जा सकता।

SCO समिट में पीएम मोदी ने आतंकवाद पर क्या कहा?

26वें शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO समिट में पीएम मोदी ने सुरक्षा को क्षेत्रीय विकास की पहली जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल के बिना आर्थिक विकास और कनेक्टिविटी को आगे बढ़ाना मुश्किल है।

प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ सिर्फ प्रतिक्रिया देने के बजाय उसके पूरे तंत्र पर कार्रवाई करने की जरूरत बताई। उन्होंने आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण, भर्ती, कट्टरपंथ और सुरक्षित ठिकानों के नेटवर्क को खत्म करने पर जोर दिया।

पीएम मोदी का यह संदेश ऐसे समय आया जब SCO के मंच पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मौजूद थे। हालांकि, पीएम मोदी ने अपने संबोधन में किसी देश का नाम लेकर निशाना नहीं साधा।

आतंकवाद पर दोहरे मापदंड स्वीकार नहीं

पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मापदंड की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सदस्य देशों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जो देश आतंकवाद को अपनी नीति का साधन बनाते हैं और आतंकियों को समर्थन या पनाह देते हैं, उन्हें स्पष्ट संदेश मिलना चाहिए। आतंकवाद को किसी भी स्थिति में रणनीतिक संपत्ति के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

पुतिन और शी जिनपिंग से पीएम मोदी की मुलाकात

SCO समिट के दौरान पीएम मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से भी मुलाकात हुई। तीनों नेताओं के बीच मुलाकात और बातचीत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खास ध्यान खींचा।

पीएम मोदी और पुतिन की बैठक में रूस-यूक्रेन युद्ध समेत द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा हुई। इससे पहले मोदी ने पुतिन से कहा था कि मानवता के हित में युद्ध को समाप्त करने और शांति की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है।

रूस और भारत के बीच ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग लगातार महत्वपूर्ण बने हुए हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की मुलाकात को भारत-रूस संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

शी जिनपिंग से भी हुई बातचीत

पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात भी SCO सम्मेलन के दौरान हुई। दोनों नेताओं के बीच बातचीत ऐसे समय हुई है जब भारत और चीन के संबंधों में सीमा विवाद के साथ-साथ व्यापार और रणनीतिक मुद्दे भी महत्वपूर्ण हैं।

सम्मेलन में मोदी, पुतिन और शी एक साथ नजर आए। समूह तस्वीर और नेताओं के बीच बातचीत को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी काफी चर्चा रही।

भारत की ओर से लगातार यह संदेश दिया जाता रहा है कि पड़ोसी देशों के साथ संबंधों में शांति और स्थिरता जरूरी है। इसके साथ ही भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता को भी प्राथमिकता देता है।

SCO में भारत का फोकस सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर पर

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में SCO के तीन प्रमुख स्तंभों का उल्लेख किया। उन्होंने इन्हें Security, Connectivity और Opportunity के रूप में सामने रखा। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब इन तीनों क्षेत्रों में केवल विजन की बात नहीं, बल्कि ठोस परिणामों पर ध्यान देने की जरूरत है।

भारत के लिए कनेक्टिविटी भी SCO के एजेंडे में महत्वपूर्ण मुद्दा है। पीएम मोदी ने कहा कि संपर्क बढ़ाने वाली परियोजनाओं को संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सिद्धांतों का सम्मान करना चाहिए।

व्यापार और परिवहन मार्गों के विस्तार से मध्य एशिया के देशों के साथ भारत के आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की संभावना है। हालांकि, कनेक्टिविटी परियोजनाओं को लेकर देशों की संप्रभुता का सम्मान भारत की प्रमुख शर्तों में शामिल है।

अफगानिस्तान और क्षेत्रीय शांति पर भी जोर

पीएम मोदी ने SCO समिट में अफगानिस्तान की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शांत और सुरक्षित यूरेशिया की साझा आकांक्षा अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता से जुड़ी हुई है।

भारत अफगानिस्तान के लोगों के लिए विकास और मानवीय सहायता जारी रखने की बात करता रहा है। पीएम मोदी ने भी इस सहयोग को आगे जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई।

अफगानिस्तान की स्थिति का असर मध्य एशिया की सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी प्रयासों पर भी पड़ता है। ऐसे में SCO के लिए यह मुद्दा लगातार महत्वपूर्ण बना हुआ है।

SCO घोषणा में भी आतंकवाद पर सख्त रुख

SCO के सदस्य देशों ने बिश्केक घोषणा में आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ प्रतिबद्धता दोहराई। घोषणा में आतंकवादी और चरमपंथी संगठनों के इस्तेमाल को अपने हितों के लिए बढ़ावा देने की कोशिशों को अस्वीकार्य बताया गया।

घोषणा में आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में दोहरे मापदंड को लेकर भी स्पष्ट रुख सामने आया। यह भारत की उस लंबे समय से चली आ रही मांग से मेल खाता है, जिसमें आतंकवाद के खिलाफ एक समान और निर्णायक कार्रवाई की बात कही जाती रही है।

इससे SCO के मंच पर आतंकवाद विरोधी सहयोग को और मजबूत करने की कोशिश दिखाई देती है।

पीएम मोदी ने संघर्षों के समाधान पर भी दिया संदेश

आतंकवाद के अलावा पीएम मोदी ने दुनिया में चल रहे संघर्षों को लेकर भी भारत का रुख रखा। उन्होंने कहा कि विवादों और संघर्षों का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए।

भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध समेत कई अंतरराष्ट्रीय संकटों पर बातचीत और कूटनीति को प्राथमिक रास्ता बताया है। SCO में भी पीएम मोदी का यही संदेश भारत की विदेश नीति के व्यापक रुख को दर्शाता है।

इस दौरान पीएम मोदी की पुतिन से हुई बातचीत भी खास रही। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत लगातार शांति और कूटनीतिक समाधान की अपील करता रहा है।

SCO समिट में भारत की कूटनीतिक भूमिका

इस सम्मेलन में भारत ने एक साथ कई अहम मुद्दों पर अपना पक्ष रखा। आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई, क्षेत्रीय शांति, आर्थिक सहयोग और बेहतर कनेक्टिविटी भारत के प्रमुख मुद्दों में रहे।

पीएम मोदी की पुतिन और शी जिनपिंग से मुलाकात ने भी सम्मेलन की कूटनीतिक अहमियत बढ़ाई। भारत ने रूस और चीन के साथ बातचीत जारी रखते हुए अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर भी जोर बनाए रखा।

SCO में भारत के सामने एक चुनौती यह भी है कि संगठन में अलग-अलग देशों के रणनीतिक हित कई बार एक-दूसरे से अलग होते हैं। ऐसे में आतंकवाद जैसे मुद्दे पर साझा सहमति बनाना महत्वपूर्ण है।

आगे क्या होगा?

SCO के मंच से आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई का संदेश सामने आया है। अब इसकी वास्तविक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सदस्य देश आतंकवाद के वित्तपोषण, भर्ती और सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ किस स्तर पर व्यावहारिक सहयोग करते हैं।

भारत के लिए यह मंच मध्य एशिया के साथ संबंध मजबूत करने और रूस-चीन समेत प्रमुख शक्तियों के साथ संवाद बनाए रखने का अवसर भी है।

निष्कर्ष

SCO समिट पीएम मोदी के लिए आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख मजबूती से रखने और प्रमुख वैश्विक नेताओं के साथ संवाद का अहम मंच रहा। पीएम मोदी ने आतंकवाद के पूरे इकोसिस्टम को खत्म करने, दोहरे मापदंड छोड़ने और आतंकवाद को रणनीतिक साधन के रूप में इस्तेमाल करने वाले देशों को स्पष्ट संदेश देने की बात कही।

पुतिन और शी जिनपिंग से मुलाकात के साथ भारत ने सुरक्षा, शांति, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग पर अपना फोकस भी सामने रखा। अब नजर इस बात पर रहेगी कि SCO के सदस्य देश आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े इन संकल्पों को जमीन पर कितनी मजबूती से लागू करते हैं।

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