दिल्ली में PM मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 से सम्मानित शिक्षकों से की मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को नई दिल्ली में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चयनित शिक्षकों से मुलाकात की। प्रधानमंत्री ने अपने आधिकारिक आवास 7 लोक कल्याण मार्ग पर शिक्षकों के साथ बातचीत की और उनके शिक्षण अनुभवों को जाना।
इस दौरान शिक्षा में नवाचार, तकनीक के इस्तेमाल, विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और बच्चों के समग्र विकास जैसे विषयों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने शिक्षकों के समर्पण की सराहना करते हुए उन्हें पाठ्यपुस्तकों से आगे बढ़कर बच्चों के जीवन से जुड़ने का संदेश दिया।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के विजेताओं से मिले PM मोदी
शिक्षक दिवस से एक दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के विजेता शिक्षकों के साथ विशेष संवाद किया। यह मुलाकात केवल औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रही। प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से उनके काम, अनुभव और विद्यार्थियों के साथ अपनाए जाने वाले तरीकों के बारे में बातचीत की।
बातचीत में शिक्षकों ने कक्षा में पढ़ाई को ज्यादा रोचक और प्रभावी बनाने के लिए अपनाए जा रहे तरीकों को साझा किया। प्रधानमंत्री ने भी बदलते समय के साथ शिक्षा पद्धति में जरूरी बदलावों पर जोर दिया।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार देश के उन शिक्षकों को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है, जिन्होंने स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों के जीवन को बेहतर बनाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है। यह पुरस्कार शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के तहत आयोजित होता है।
बातचीत में नवाचार और तकनीक पर रहा जोर
प्रधानमंत्री मोदी और शिक्षकों की बातचीत में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार प्रमुख विषय रहा। बदलती तकनीक के दौर में कक्षा में डिजिटल संसाधनों और नए तरीकों के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई।
शिक्षकों ने बताया कि किस तरह वे विद्यार्थियों को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय अलग-अलग गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर देते हैं। इससे छात्रों में विषय को समझने के साथ-साथ अपनी बात रखने का आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
प्रधानमंत्री ने शिक्षकों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक शिक्षा को बेहतर बनाने का साधन है, लेकिन शिक्षक और विद्यार्थी के बीच मानवीय जुड़ाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ाने पर हुई चर्चा
बातचीत के दौरान सार्वजनिक रूप से बोलने और विद्यार्थियों के आत्मविश्वास से जुड़ा मुद्दा भी सामने आया। प्रधानमंत्री ने एक शिक्षिका से पूछा कि वह बच्चों की झिझक दूर करने और उन्हें लोगों के सामने अपनी बात रखने के लिए कैसे तैयार करती हैं।
यह चर्चा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कई विद्यार्थी पढ़ाई में अच्छे होने के बावजूद सार्वजनिक मंच पर अपनी बात रखने में हिचकते हैं। ऐसे में स्कूल स्तर पर संवाद, गतिविधियों और अभ्यास के जरिए उनका आत्मविश्वास बढ़ाने में शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने शिक्षकों के अनुभवों को ध्यान से सुना। बातचीत का यह हिस्सा शिक्षा में केवल परीक्षा परिणाम के बजाय विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास के महत्व को भी रेखांकित करता है।
बच्चों के बचपन को सुरक्षित रखने का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षकों से कहा कि उनकी भूमिका केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं है। शिक्षकों को बच्चों के जीवन और उनके बचपन से भी जुड़ना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि हर विद्यार्थी के भीतर जिज्ञासा और सीखने की इच्छा बनी रहनी चाहिए। बच्चों को पढ़ाई के दबाव के बीच रचनात्मक गतिविधियों और सहज वातावरण का अवसर मिलना भी जरूरी है।
उन्होंने शिक्षकों से अपने भीतर के बच्चे को भी जीवित रखने की बात कही। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के साथ बेहतर जुड़ाव और उनकी भावनाओं को समझने की जरूरत पर जोर देना था।
स्क्रीन की लत और नशे से बचाने पर भी चर्चा
शिक्षकों के साथ बातचीत में विद्यार्थियों के सामने मौजूद मौजूदा चुनौतियों का मुद्दा भी उठा। इनमें स्क्रीन की बढ़ती आदत और नशे की समस्या प्रमुख रही।
प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से विद्यार्थियों के व्यवहार में होने वाले बदलावों पर नजर रखने और उन्हें सही दिशा देने की जरूरत बताई। स्कूल बच्चों के लिए केवल पढ़ाई की जगह नहीं है, बल्कि उनके व्यक्तित्व और सामाजिक व्यवहार के विकास का भी महत्वपूर्ण केंद्र है।
शिक्षक विद्यार्थियों के साथ लगातार संपर्क में रहते हैं। इसलिए वे बच्चों में होने वाले बदलावों को जल्दी पहचान सकते हैं और जरूरत पड़ने पर अभिभावकों के साथ मिलकर उचित कदम उठा सकते हैं।
सामाजिक जागरूकता में शिक्षकों की भूमिका
बातचीत के दौरान एक शिक्षिका ने स्वास्थ्य जागरूकता से जुड़े अपने काम के बारे में भी बताया। उन्होंने स्तन कैंसर को लेकर जागरूकता फैलाने के प्रयासों का उल्लेख किया। इसके जवाब में प्रधानमंत्री ने निवारक स्वास्थ्य देखभाल और नियमित जांच के महत्व पर जोर दिया।
इससे यह भी सामने आया कि शिक्षक की भूमिका केवल कक्षा में पढ़ाने तक सीमित नहीं रहती। कई शिक्षक अपने विद्यालय और आसपास के समुदाय में सामाजिक जागरूकता से जुड़े काम भी करते हैं।
ऐसे प्रयास विद्यार्थियों को किताबों से बाहर की दुनिया समझने में मदद करते हैं। इससे उनमें जिम्मेदारी और समाज के प्रति संवेदनशीलता विकसित हो सकती है।
5 सितंबर को राष्ट्रपति करेंगी राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 का औपचारिक पुरस्कार समारोह 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित किया जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले 48 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान करेंगी।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार योजना के तहत देशभर के उत्कृष्ट शिक्षकों को उनके योगदान के लिए सार्वजनिक मान्यता दी जाती है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह पुरस्कार वर्ष 1958 में शुरू किया गया था और हर साल 5 सितंबर को प्रदान किया जाता है।
पुरस्कार के लिए चयन प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की जाती है। इस वर्ष भी ऑनलाइन नामांकन, जिला और राज्य स्तर की छंटनी तथा राष्ट्रीय जूरी की प्रक्रिया के बाद विजेताओं का चयन किया गया।
उच्च शिक्षा और पॉलिटेक्निक के शिक्षकों को भी राष्ट्रीय सम्मान
शिक्षक दिवस 2026 पर स्कूल शिक्षकों के अलावा उच्च शिक्षा संस्थानों और पॉलिटेक्निक के शिक्षकों के लिए भी राष्ट्रीय पुरस्कार की व्यवस्था की गई है। राष्ट्रपति 5 सितंबर को ऐसे 21 शिक्षकों और संकाय सदस्यों को भी राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान करेंगी।
इन 21 पुरस्कार विजेताओं में केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों के 12 शिक्षक, राज्य विश्वविद्यालयों के 5 शिक्षक और पॉलिटेक्निक के 4 शिक्षक शामिल हैं। चयन में सरकारी और निजी संस्थानों से जुड़े शिक्षक भी शामिल हैं।
इससे स्पष्ट है कि शिक्षक दिवस पर राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के अलग-अलग क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम करने वाले शिक्षकों को सम्मान देने पर जोर दिया जा रहा है।
शिक्षा में शिक्षक की भूमिका पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण
तकनीक के तेजी से विस्तार के बावजूद शिक्षक की भूमिका कम नहीं हुई है। बल्कि डिजिटल दौर में विद्यार्थियों को सही जानकारी चुनने, सवाल पूछने और उसका तार्किक जवाब खोजने के लिए मार्गदर्शन की जरूरत बढ़ी है।
एक अच्छा शिक्षक केवल विषय नहीं पढ़ाता। वह विद्यार्थियों में जिज्ञासा, अनुशासन, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना विकसित करता है। यही वजह है कि राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार जैसे सम्मान शिक्षकों के योगदान को पहचान देने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
प्रधानमंत्री के साथ हुई बातचीत में भी इसी व्यापक भूमिका पर जोर दिखाई दिया। शिक्षकों को विद्यार्थियों की पढ़ाई के साथ उनके भावनात्मक और सामाजिक विकास पर ध्यान देने का संदेश दिया गया।
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 क्यों है खास?
इस वर्ष के पुरस्कारों में उन शिक्षकों के काम को सामने लाया जा रहा है, जिन्होंने अलग-अलग परिस्थितियों में नवाचार के जरिए शिक्षा को बेहतर बनाया। कई शिक्षक तकनीक, स्थानीय संसाधनों और वास्तविक जीवन के उदाहरणों का इस्तेमाल करके विद्यार्थियों के लिए सीखने की प्रक्रिया को आसान बना रहे हैं।
ऐसे शिक्षकों के अनुभव दूसरे स्कूलों के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं। इससे शिक्षण के नए तरीकों को अपनाने और विद्यार्थियों की जरूरत के अनुसार कक्षा को बदलने की प्रेरणा मिलती है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के विजेता शिक्षकों के साथ मुलाकात शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षा के व्यापक महत्व को सामने लाती है। बातचीत में नवाचार, तकनीक, विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और बच्चों के बचपन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से किताबों से आगे बढ़कर विद्यार्थियों के जीवन से जुड़ने की अपील की। वहीं 5 सितंबर को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू नई दिल्ली के विज्ञान भवन में 48 स्कूल शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान करेंगी। ऐसे सम्मान देश के उन शिक्षकों को पहचान देते हैं, जो अपने प्रयासों से शिक्षा की गुणवत्ता और विद्यार्थियों के भविष्य को बेहतर बनाने में योगदान दे रहे हैं।

