May 17, 2026

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पी20 शिखर सम्मलेन के आयोजन पर पीएम मोदी ने आतंकवाद को लेकर दिया बड़ा बयान, कहा आतंकवाद पर आम सहमति नहीं होना दुखद

भारत में पार्लियमेंट-20 यानि पी-20 समिट का आयोजन हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राजधानी दिल्ली में इस कार्यक्रम का उद्द्घाटन करते हुए पी-20 देशों के नेताओं को सम्बोधित किया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ये समिट एक महाकुंभ है। आप सभी लोगों का यहाँ आना शुभ है। यह शांति और भाईचारे का समय है, साथ मिलकर चलने का समय है।

पीएम मोदी ने इजरायल और हमास के बीच चल रही लड़ाई को लेकर कहा दुनिया के कोने में जो कुछ चल रहा है उससे कोई भी अछूता नहीं है। हमें दुनियां को एक परिवार की तरह देखना होगा। संघर्ष किसी के हित में नहीं है। इजरायल और हमास के बीच पिछले एक हफ्ते से लड़ाई चल रही है, जिसमे अब तक हजारों लोगों की मौत हो चुकी है।

दशकों से भारत झेल रहा है आतंकवाद को

पी-20 समिट को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा ‘ये सबके विकास और कल्याण का समय है। हमें वैश्विक विकास के संकट को दूर करना होगा और मानव केंद्रित सोच पर आगे बढ़ता है। हमें विश्व को वन अर्थ, वन फैमिली  और वन भावना के नजरिए से देखना होगा। भारत दशकों से सीमापार आतंकवाद का सामना कर रहा है। यहां आतंकियों ने हजारों निर्दोष लोगों की जान ली है। आतंवादियों ने करीब 20 साल पहले हमारी संसद को निशाना बनाया था। उस समय संसद का सत्र चल रहा था। उस समय आतंकवादियों की तैयारी संसद को बंधक बनाने की और उसे ख़त्म करने की थी। भारत ऐसी अनेक आतंकी वारदातों से निपटते हुए यहाँ पहुँचा है। आतंक दुनियां के लिए चुनौती है।

प्रधानमंत्री ने आतंकवाद को लेकर कहा कि आज दुनियां को एहसास हो रहा है कि आतंकवाद दुनियां के लिए कितनी बड़ी चुनौती है। आतंकवाद दुनियां के किसी भी हिस्से में हो, किसी भी रूप में हो या किसी भी कारण से हो मानवता के विरुद्ध ही होता है। ऐसे में हमें आतंकवाद के खिलाफ सख्ती बरतने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद का एक वैश्विक पक्ष और है, जिसकी तरफ मैं आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। अभी तक आतंकवाद की परिभाषा को लेकर आम सहमति नहीं बन पाई है, यह बहुत दुखद है। आज भी यूनाइटेड नेशन में इंटरनेशनल कन्वेंशन ऑन कांबेटिंग टेररिज्म कंसेंसस का इंतजार किया जा रहा है। पीएम ने कहा कि दुनिया के इसी रवैया का फायदा मानवता के दुश्मन उठा रहे हैं। दुनिया भर की संसद के रिप्रेजेंटेटिव को सोचना होगा कि आतंकवाद के खिलाफ इस लड़ाई में हम कैसे मिलकर काम कर सकते हैं।

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