May 17, 2026

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मध्य प्रदेश के एक जोड़े (ऋषभ और पूजा) ने खोला राज्य का पहला हाइड्रोपोनिक फार्म

मध्य प्रदेश के इंदौर में एक कपल ने खोला हाइड्रोपोनिक फार्म

एक एकड़ में चार एकड़ के बराबर की खेती , मिट्टी की जरुरत नहीं , पानी की जरुरत भी सामान्य खेती के मुकाबले बहुत कम और लागत भी कम | यह कमाल है हाइड्रोपोनिक खेती का | इसकी शुरुआत की इंदौर के एक कपल  ऋषभ और पूजा ने | यह तकनीक इजराइल में विकसित हुई है जहाँ खेती के लिए जमीन कम है वहाँ घरों में इसी तकनीक के द्वारा खेती की जाती है | भारत में इस तकनीक का उपयोग अभी केबल सब्जियाँ उगाने में ही किया जा रहा है |

इंदौर के इस कपल ने इस खेती को लॉक डाउन के समय शुरू किया था और आज यह स्टार्टअप 1  करोड़ की कमाई के क्लब में पहुंच चूका है यह मध्य प्रदेश में कमर्शियल लेवल का पहला बडा फार्म है | ये लोग खेती की तकनीक तो सिखाते ही है और अपने खेत में से सब्जी तोड़ने का मौका भी देते हैं |

आईये जानते हैं कैसे शुरुआत हुई हाइड्रोपोनिक खेती की तकनीक की

बात 7 साल पहले की है जब ऋषभ को विटामिन बी 12 और डी 3 की कमी हो गयी उन्होंने डॉक्टर को दिखाया तो डॉक्टर ने उन्हें सप्पलीमेंट्स लिख दिए| सप्प्लिमेंट्स लेने से पहले ही ऋषभ को प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एंड कमर्शलाइजेशन की पढ़ाई के लिए ऑस्ट्रेलिया जाना पड़ा | वहाँ जाने के कुछ दिन बाद जांच कराई तो पता चला की विटामिन बी 12 और डी 3 की कमी पूरी हो गयी है | तो ऋषभ को शंका हुयी कि बिना सप्प्लिमेंट्स के विटामिन की कमी कैसे पूरी हो गयी उन्होंने जानकारी जुटाना शुरू किया तब उन्हें पता चला कि ऑस्ट्रेलिया में वे जो सब्जियाँ खा रहे हैं उनमे पर्याप्त मात्रा में विटामिन और मिनरल्स हैं | फिर जब ऋषभ भारत लौटे तब उन्हें दुबारा विटामिन बी 12 और विटामिन डी 3 की कमी हो गई | ऋषभ बताते है कि भारत में खेती में पेस्टीसाइट्स का उपयोग अधिक मात्रा में किया जाता है जिससे नेचुरल विटामिन्स और मिनरल्स नष्ट हो जाते हैं | जिससे लोग कम उम्र में ही बीमार रहने लगते हैं |

अब बात उनके स्टार्टअप की

ऋषभ बताते है कि आने वाले वक्त में भारत में भी खेती के लिए बहुत कम भूमि रह जाएगी उस समय में इस तकनीक की मदद से कम जगह में ज्यादा खेती की जा सकेगी , इसीलिए खेती के विकल्पों पर अभी से काम करने की जरूरत है | यही सब सोच कर हमने हाइड्रोपोनिक फार्मिंग की तरफ कदम बढ़ाये | परिवार में बात करके इस दिशा में कदम बढ़ाया | मार्च २०२२ में नेमावर रोड पर 1 करोड़ के निवेश के साथ डकारिया फ्रेश के नाम से इस खेती की शुरुआत की | ऋषभ बताते है कि इस खेती को शुरू करने से पहले हमने ऑनलाइन रिसर्च की , डॉक्यूमेंट्री देखी , उन्होंने इस तरह की खेती करने वाले दूसरे फार्म भी तलाशे | अहमदाबाद , गुड़गांव और वड़ोदरा के फार्म भी विजिट किये | ऑनलाइन कोर्सेज भी अटेंड किये | जब ऋषभ और पूजा ने यह खेती शुरू की तो उन्हें यह भी चिंता होने लगी कि इंदौर में जहाँ लोग सब्जी लेने में मोल भाव करते हैं वहाँ पर कैसे इन सब्जियों को बेचेंगे | इसके लिए ऋषभ और पूजा ने लोगों से बातें करना शुरू किया और उन्हें इन सब्जियों की विशेषताएं बतायी | लोगों को जागरूक करने के लिए और बिजिनेस को बढ़ाने के लिए डिजिटल एड्स और सोसाइटी कैंप भी लगाए | पूजा बताती है कि कोरोना के समय से लोग अपने स्वस्थ्य पर भी ध्यान देने लगे थे जिससे लोगों को समझाने में ज्यादा समस्या नहीं आयी | इसलिए हमें अच्छा रिस्पांस मिला | आज उनकी सब्जियां शहर के प्रमुख स्टोर्स  पर उपलब्ध हैं | इस बिजनेस से आज वह हर महीने 3 से 4 लाख तक की सेल करते हैं |

ऐसे होती है हाइड्रोपोनिक फार्मिंग

हाइड्रोपोनिक फार्मिंग मतलब बिना मिट्टी के खेती | इस खेती के लिए जमीन यानी मिट्टी की जरूरत नहीं होती है | जमीन की जगह पाइप या स्टैंड्स में खेती की जाती है | पौधों की जड़े इसी पानी में रहती हैं पौधों को जरुरी मिनरल्स और विटामिन लिक्विड फॉर्म में इसी पानी के द्वारा दिए जाते हैं | पानी को आर रो के द्वारा फ़िल्टर किया जाता है जिससे कम समय में अच्छा उत्पादन होता है | इस प्रोसेस में पौधों को अलग अलग रखा जाता है | इस खेती में बीज के ख़राब होने की आशंका बहुत कम होती है | यह पूरा सिस्टम ऑटोमेटिक होता है जिसे आप कहीं भी बैठ कर ऑपरेट कर सकते हैं |

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