Headlines

जबलपुर बोट हादसे की दर्दभरी कहानी, बेटे की बातें याद कर टूट गया परिवार

Spread the love

मध्य प्रदेश के जबलपुर में कुछ दिन पहले हुए दर्दनाक बोट हादसे ने पूरे देश को गहरे सदमे में डाल दिया था। इस हादसे में कई लोगों की जान चली गई और कई परिवारों की खुशियां पल भर में बिखर गईं। हादसे के बाद सोशल मीडिया पर एक तस्वीर तेजी से वायरल हुई थी, जिसमें एक मां अपने छोटे बेटे को सीने से लगाए दिखाई दे रही थी। उस तस्वीर ने लाखों लोगों को भावुक कर दिया था। अब इस हादसे को लेकर मृतक बच्चे के पिता ने जो बातें साझा की हैं, उन्हें सुनकर हर किसी की आंखें नम हो रही हैं।

दिल्ली निवासी प्रदीप कुमार ने इस हादसे में अपनी पत्नी और चार साल के बेटे त्रिशान को खो दिया। उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया कि हादसे से पहले उनका बेटा लगातार पानी में जाने को लेकर डर जता रहा था। परिवार ने उस समय बच्चे की बातों को सामान्य डर समझा, लेकिन अब वही बातें उन्हें अंदर तक तोड़ रही हैं।

पापा, पानी में नहीं जाना चाहिए”

प्रदीप कुमार ने बताया कि जब परिवार बोटिंग के लिए जा रहा था, तब उनका बेटा बार-बार कह रहा था, “पापा, पानी में नहीं जाना चाहिए, लोग पानी में डूब जाते हैं।” परिवार के लोगों ने बच्चे को समझाने की कोशिश की और सोचा कि शायद वह पानी से डर रहा है। लेकिन हादसे के बाद अब वही शब्द परिवार को लगातार याद आ रहे हैं।

उन्होंने बताया कि बोट में बैठने के बाद भी उनका बेटा असहज महसूस कर रहा था। प्रदीप कुमार ने कहा कि अचानक उनके बेटे ने उनसे पूछा, “पापा, हम डूब रहे हैं क्या?” उस समय वहां कोई अफरा-तफरी नहीं थी और न ही किसी को किसी खतरे का अंदेशा था। इसलिए उन्होंने बेटे को चुप रहने के लिए थोड़ा डांट दिया।

पिता ने भावुक होकर कहा कि अब उन्हें लगता है कि शायद बच्चे को किसी अनहोनी का एहसास हो गया था। उन्होंने रोते हुए कहा कि उस समय उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर बाद इतनी बड़ी दुर्घटना हो जाएगी। बेटे की वही बातें अब उन्हें हर पल याद आती हैं।

त्रिशान की बड़ी बहन सिया ने भी बताया कि उसका छोटा भाई पूरे सफर के दौरान पानी में जाने को लेकर घबराया हुआ था। उसने कई बार कहा था कि पानी खतरनाक होता है। हादसे के बाद परिवार इन बातों को याद कर बेहद दुखी है।

हादसे के बाद बदल गया परिवार का जीवन

इस हादसे के बाद प्रदीप कुमार का पूरा परिवार गहरे सदमे में है। उन्होंने बताया कि जब वे दिल्ली लौटे तो घर का माहौल पूरी तरह बदल चुका था। परिवार के लोग अब तक इस हादसे के दर्द से बाहर नहीं निकल पाए हैं।

प्रदीप कुमार ने कहा कि उनकी पत्नी ने ट्रिप पर जाने से पहले जो बैग पैक किए थे, वे आज भी वैसे ही रखे हुए हैं। परिवार में किसी की हिम्मत नहीं हुई कि उन बैग्स को खोला जाए। उन्होंने भावुक होकर कहा कि उन सामानों को देखते ही पत्नी और बेटे की यादें ताजा हो जाती हैं।

उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट से घर लौटने के बाद घर में सन्नाटा छा गया। हर कोना उन्हें अपने बेटे और पत्नी की याद दिलाता है। परिवार अभी भी इस सच्चाई को स्वीकार नहीं कर पा रहा कि उनके अपने अब इस दुनिया में नहीं हैं।

सोशल मीडिया पर लोगों की भावुक प्रतिक्रियाएं

इस दर्दनाक घटना की कहानी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोग बेहद भावुक नजर आए। कई यूजर्स ने लिखा कि छोटे बच्चों का मन बहुत साफ होता है और कभी-कभी उन्हें आने वाले खतरे का एहसास हो जाता है। कुछ लोगों ने कहा कि यह कहानी पढ़कर उनकी आंखों में आंसू आ गए।

एक यूजर ने लिखा कि भगवान किसी भी परिवार को ऐसा दुख न दे। वहीं दूसरे लोगों ने हादसे में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

जबलपुर बोट हादसे की यह घटना अब सिर्फ एक दुर्घटना नहीं रह गई है, बल्कि यह एक ऐसे परिवार का दर्द बन चुकी है जिसने कुछ ही पलों में अपने सबसे प्यारे लोगों को खो दिया। मासूम बच्चे की बातें अब हर किसी को भावुक कर रही हैं और लोग इस परिवार के दुख में शामिल होते दिखाई दे रहे हैं।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *