राम मंदिर दान पर उठे सवाल: 11 महीनों में दान से ज्यादा ब्याज की कमाई, क्या हर श्रद्धालु औसतन सिर्फ ₹5 दे रहा है?
अयोध्या:
अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इस बार वजह मंदिर निर्माण या धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ट्रस्ट की वित्तीय रिपोर्ट है। हाल ही में सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, पिछले 11 महीनों के दौरान राम मंदिर ट्रस्ट को जितनी राशि दान के रूप में मिली, उससे कहीं अधिक आय बैंक ब्याज से प्राप्त हुई। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के औसत दान और ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।
दान से कम, ब्याज से ज्यादा हुई कमाई
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 11 महीनों में मंदिर को कुल करीब 83 करोड़ रुपये का दान प्राप्त हुआ। इसमें दानपात्र (हुंडी), काउंटर दान, ऑनलाइन योगदान और विदेशी दान (FCRA) शामिल हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक:
- दानपात्रों से लगभग 54.79 करोड़ रुपये
- काउंटरों के माध्यम से 18.88 करोड़ रुपये
- ऑनलाइन दान से 8.33 करोड़ रुपये
- FCRA के तहत करीब 78 लाख रुपये
इस तरह कुल दान राशि लगभग 82.78 करोड़ रुपये रही।
दूसरी ओर, ट्रस्ट के विभिन्न बैंक खातों में जमा धनराशि पर केवल ब्याज से 138.03 करोड़ रुपये की आय दर्ज की गई। यानी कुल आय का बड़ा हिस्सा ब्याज से आया, जिसने दान की राशि को भी पीछे छोड़ दिया।
क्या हर श्रद्धालु औसतन सिर्फ ₹5 का दान दे रहा है?
इन आंकड़ों के सामने आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि राम मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं का औसत दान बेहद कम दिखाई दे रहा है।
विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या को आधार माना जाए, तो प्रति व्यक्ति औसत दान करीब ₹5 के आसपास बैठता है। हालांकि यह केवल उपलब्ध आंकड़ों और अनुमानित दर्शनार्थियों की संख्या के आधार पर निकाला गया निष्कर्ष है।
यही कारण है कि कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या अधिकांश श्रद्धालु बिना दान किए लौट रहे हैं, या फिर दान संग्रह प्रणाली में किसी प्रकार की कमी मौजूद है।
दान व्यवस्था पर क्यों उठ रहे हैं सवाल?
राम मंदिर देश और दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। प्राण प्रतिष्ठा के बाद यहां आने वाले भक्तों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है।
ऐसे में जब लाखों लोग नियमित रूप से दर्शन कर रहे हैं, तो अपेक्षा की जा रही थी कि दान की राशि भी उसी अनुपात में अधिक होगी। लेकिन उपलब्ध वित्तीय आंकड़ों ने कई लोगों को हैरान कर दिया है।
कुछ श्रद्धालुओं का कहना है कि मंदिर परिसर में डिजिटल दान व्यवस्था को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है, जबकि कुछ लोग दान गिनती और प्रबंधन प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
दानपात्र चोरी के आरोपों ने बढ़ाई चिंता
वित्तीय आंकड़ों पर चर्चा ऐसे समय में शुरू हुई है जब मंदिर के दानपात्रों से कथित चोरी के मामले भी सुर्खियों में हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ कर्मचारियों पर दान राशि में गड़बड़ी और चोरी के आरोप लगे हैं। जांच के दौरान कुछ संदिग्ध कर्मचारियों के पास से नकदी और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज मिलने की भी खबरें सामने आईं।
विपक्षी नेताओं ने इस मामले को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि ट्रस्ट ने स्वयं निष्पक्ष जांच की मांग की है।
SIT जांच से मिलेगी तस्वीर साफ
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। तीन सदस्यीय टीम को पूरे मामले की जांच कर निर्धारित समय में रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी गई है।
जांच में दान संग्रह, रिकॉर्ड प्रबंधन, CCTV फुटेज और वित्तीय लेनदेन से जुड़े पहलुओं की भी समीक्षा की जा रही है।
यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
ट्रस्ट ने क्या कहा?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मंदिर की वित्तीय व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी है।
ट्रस्ट का कहना है कि वर्तमान में मिलने वाला ब्याज पूर्व में जमा बड़ी धनराशि पर आधारित है। यही कारण है कि ब्याज से होने वाली आय अधिक दिखाई दे रही है।
ट्रस्ट पदाधिकारियों के अनुसार, मंदिर निर्माण, रखरखाव और भविष्य की सुविधाओं के लिए वित्तीय संसाधनों का सावधानीपूर्वक उपयोग किया जा रहा है।
पारदर्शिता बढ़ाने की मांग
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि देश के बड़े धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूत किया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों ने सुझाव दिए हैं कि:
- दान संग्रह की डिजिटल मॉनिटरिंग बढ़ाई जाए।
- स्वतंत्र ऑडिट नियमित रूप से कराया जाए।
- दान और खर्च की जानकारी सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाए।
- CCTV निगरानी को मजबूत किया जाए।
- ऑनलाइन दान प्रणाली को और आसान बनाया जाए।
आगे क्या?
अब सभी की नजर SIT जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि दान से जुड़े विवादों में कितनी सच्चाई है और क्या वास्तव में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है।
राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। ऐसे में मंदिर की वित्तीय व्यवस्था पर उठ रहे सवालों का निष्पक्ष और पारदर्शी समाधान होना जरूरी है ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास पूरी तरह बना रहे।
ट्रस्ट के दस्तावेजों के अनुसार लगभग 11 महीनों में करीब 82.78 से 83 करोड़ रुपये का दान प्राप्त हुआ।
उसी अवधि में विभिन्न बैंक खातों पर ब्याज के रूप में लगभग 138.03 करोड़ रुपये की आय दर्ज की गई।
मंदिर में आने वाले अनुमानित श्रद्धालुओं की संख्या और कुल दान राशि के आधार पर कुछ विश्लेषकों ने प्रति श्रद्धालु औसत दान लगभग ₹5 होने का अनुमान लगाया है।
हां, दानपात्रों से कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए SIT गठित की गई है।
ट्रस्ट का कहना है कि सभी फंड सुरक्षित हैं, वित्तीय व्यवस्था पारदर्शी है और ब्याज की अधिक आय पुराने जमा फंड के कारण हुई है।

