एमपी कैबिनेट के बड़े फैसले 2026: इंदौर मेट्रो, 94 गांवों के पुनर्वास समेत ₹24,200 करोड़ की योजनाओं को मंजूरी
भोपाल, 16 जून 2026। मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं, वन्यजीव संरक्षण और जनजातीय विकास को नई दिशा देने वाले कई बड़े फैसलों पर मुहर लगा दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में करीब ₹24,200 करोड़ की विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इनमें सबसे बड़ा निर्णय इंदौर मेट्रो परियोजना की संशोधित लागत को स्वीकृति देने और संरक्षित वन क्षेत्रों में बसे 94 गांवों के पुनर्वास से जुड़ा रहा।
इंदौर मेट्रो परियोजना की लागत बढ़कर ₹19,472 करोड़
कैबिनेट बैठक में इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के लिए संशोधित बजट को मंजूरी दी गई। पहले इस परियोजना की लागत ₹7,500.80 करोड़ निर्धारित की गई थी, जिसे अब बढ़ाकर ₹19,472.29 करोड़ कर दिया गया है।
सरकार के अनुसार निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों, वित्तीय लागत और परियोजना के विस्तारित दायरे के कारण खर्च में वृद्धि हुई है। अतिरिक्त धनराशि की व्यवस्था केंद्र और राज्य सरकार की इक्विटी, ऋण तथा अन्य वित्तीय स्रोतों से की जाएगी।
सरकार का दावा है कि मेट्रो परियोजना पूरी होने के बाद इंदौर में ट्रैफिक दबाव कम होगा, सार्वजनिक परिवहन मजबूत होगा और प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी। साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
वन क्षेत्रों से 94 गांवों का पुनर्वास, ₹2,381 करोड़ मंजूर
वन्यजीव संरक्षण को मजबूत बनाने के लिए कैबिनेट ने ₹2,381.15 करोड़ के विशेष पैकेज को मंजूरी दी है। यह राशि वर्ष 2026 से 2031 तक खर्च की जाएगी।
इसमें से ₹1,250 करोड़ संरक्षित वन क्षेत्रों में स्थित 94 गांवों के पुनर्वास और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने पर खर्च होंगे। यह योजना संजय टाइगर रिजर्व, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, पन्ना टाइगर रिजर्व, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, रतापानी टाइगर रिजर्व, ओरछा अभयारण्य और कूनो नेशनल पार्क जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लागू की जाएगी।
शेष ₹1,131.15 करोड़ वन्यजीव आवास सुधार, जल स्रोत विकास, अग्नि सुरक्षा, वन मार्गों के रखरखाव और हाथी प्रबंधन जैसी गतिविधियों पर खर्च किए जाएंगे।
स्वास्थ्य क्षेत्र को मिलेगा नया आधार
राज्य में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकार ने मेगा हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोत्साहन नीति-2026 के क्रियान्वयन हेतु पांच सदस्यीय मंत्रिमंडलीय उपसमिति गठित की है।
यह समिति सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों की स्थापना, मेडिकल शिक्षा के विस्तार और आम नागरिकों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के संबंध में सुझाव देगी।
इसके अलावा रीवा, देवास और गुना के कुछ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को पायलट आधार पर आउटसोर्स मॉडल से संचालित करने का निर्णय लिया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होने की उम्मीद है।
जनजातीय कल्याण और रोजगार योजनाओं को बढ़ावा
कैबिनेट ने जनजातीय कार्य विभाग की विभिन्न योजनाओं के लिए ₹687 करोड़ मंजूर किए हैं। इस राशि का उपयोग छात्रावासों, आश्रम शालाओं, बालवाड़ियों के संचालन और कर्मचारियों के वेतन-भत्तों के भुगतान में किया जाएगा।
वहीं रेशम उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए ₹639.25 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
श्रम विभाग की योजनाओं के लिए भी ₹531.78 करोड़ मंजूर किए गए हैं, जिनका उपयोग असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, प्रवासी मजदूरों और बाल श्रमिक पुनर्वास कार्यक्रमों में किया जाएगा।
कैबिनेट के अन्य प्रमुख फैसले
- स्थानीय निधि लेखा परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ₹492.45 करोड़ की मंजूरी।
- वन्यजीव पर्यटन विकास से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण योजनाओं को जारी रखने का निर्णय।
- सरकारी कर्मचारियों के तबादलों की समय सीमा बढ़ाने का फैसला।
- पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन विकास से जुड़े कई प्रस्तावों को स्वीकृति।
मुख्यमंत्री ने बताया विकास का रोडमैप
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कैबिनेट के ये फैसले प्रदेश को विकसित राज्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे। उनके अनुसार इंदौर मेट्रो आधुनिक शहरी परिवहन व्यवस्था का नया मॉडल बनेगी, जबकि वन क्षेत्रों में पुनर्वास योजना पर्यावरण संरक्षण और मानव हितों के बीच संतुलन स्थापित करेगी।
सरकार का लक्ष्य इन परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा कर राज्य की अर्थव्यवस्था, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं को नई गति देना है।
मध्य प्रदेश कैबिनेट ने विभिन्न विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रमों के लिए कुल ₹24,200 करोड़ से अधिक की राशि को मंजूरी दी है।
कैबिनेट ने इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की संशोधित लागत को मंजूरी दी है, जो अब बढ़कर ₹19,472.29 करोड़ हो गई है।
संरक्षित वन क्षेत्रों में स्थित 94 गांवों के पुनर्वास और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने के लिए ₹1,250 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
सरकार ने मेगा हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोत्साहन नीति-2026 के क्रियान्वयन के लिए मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन किया है और रीवा, देवास तथा गुना के कुछ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आउटसोर्स मॉडल पर संचालित करने की मंजूरी दी है।
जनजातीय कार्य विभाग के लिए ₹687 करोड़, रेशम उद्योग को बढ़ावा देने के लिए ₹639.25 करोड़ और श्रमिक कल्याण योजनाओं के लिए ₹531.78 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है, जिससे शिक्षा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा।

