राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: SIT जांच में तेजी, ट्रस्ट अधिकारियों से पूछताछ, योगी आदित्यनाथ का सख्त संदेश
अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे की राशि और कीमती वस्तुओं की कथित चोरी का मामला देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस संवेदनशील मामले में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) लगातार जांच कर रहा है। जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है।
कैसे शुरू हुआ राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद?
राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के बाद देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा बड़ी मात्रा में नकद दान, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य मूल्यवान वस्तुएं चढ़ाई जा रही हैं।
मामला तब सामने आया जब कुछ पूर्व कर्मचारियों और कारसेवकों ने आरोप लगाया कि मंदिर के दानपात्रों से प्राप्त चढ़ावे में गड़बड़ी हो रही है। आरोपों के अनुसार लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये के दान का हिसाब स्पष्ट नहीं है।
सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे ने तेजी से चर्चा पकड़ी, जिसके बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्वयं निष्पक्ष जांच की मांग की।
SIT जांच क्यों गठित की गई?
मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून 2026 को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया।
SIT में शामिल अधिकारी
- विजय विश्वास पंत (मंडलायुक्त, लखनऊ)
- किरन एस (आईजी रेंज)
- नील रतन (विशेष सचिव, वित्त)
सरकार ने टीम को प्रारंभिक रिपोर्ट 7 दिनों और विस्तृत रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर सौंपने के निर्देश दिए हैं।
SIT जांच में अब तक क्या-क्या सामने आया?
जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदु सामने आए हैं जो पूरे मामले को और गंभीर बनाते हैं।
CCTV फुटेज में छेड़छाड़ के संकेत
SIT को मंदिर परिसर के CCTV रिकॉर्ड में संदिग्ध गतिविधियों और संभावित छेड़छाड़ के संकेत मिले हैं। जांच एजेंसियों ने संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड को फोरेंसिक जांच के लिए सुरक्षित कर लिया है।
नकदी और मूल्यवान सामग्री की बरामदगी
जांच के दौरान कुछ संदिग्ध कर्मचारियों के ठिकानों से नकदी और अन्य सामग्री बरामद होने की जानकारी सामने आई है। इन बरामदगियों की जांच जारी है।
कई कर्मचारियों और अधिकारियों से पूछताछ
SIT अब तक 60 से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है, जिनमें शामिल हैं:
- ट्रस्ट पदाधिकारी
- बैंक कर्मचारी
- दान गिनती से जुड़े कर्मचारी
- निजी एजेंसी के प्रतिनिधि
- सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े लोग
ट्रस्ट अधिकारियों से हुई लंबी पूछताछ
जांच एजेंसी ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारियों से पूछताछ की है।
किन पहलुओं की जांच हो रही है?
- बैंक खातों का ऑडिट
- दान राशि का रिकॉर्ड
- आंतरिक निगरानी व्यवस्था
- सुरक्षा प्रोटोकॉल
- दानपात्रों की गिनती प्रक्रिया
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कहीं व्यवस्था में कोई बड़ी खामी या साजिश तो नहीं थी।
योगी आदित्यनाथ का अयोध्या दौरा और बड़ा बयान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या पहुंचकर स्पष्ट कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने कहा कि यदि किसी के पास मामले से जुड़ा कोई प्रमाण है तो उसे SIT को उपलब्ध कराना चाहिए।
योगी ने श्रद्धालुओं से अफवाहों से बचने और जांच पूरी होने तक धैर्य बनाए रखने की अपील भी की।
ट्रस्ट ने क्या कहा?
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का कहना है कि उसने स्वयं निष्पक्ष जांच की मांग की थी ताकि सच्चाई सामने आ सके।
ट्रस्ट के अनुसार:
- नियमित ऑडिट कराया जाता है।
- अधिकांश चढ़ावा बैंक खातों में जमा किया जाता है।
- पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी प्रक्रियाओं की समीक्षा की जा रही है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज
मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है।
विपक्ष के आरोप
विपक्षी दलों ने पूरे मामले की स्वतंत्र और न्यायिक जांच की मांग की है।
भाजपा का जवाब
भाजपा नेताओं और कई हिंदू संगठनों ने कहा है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
आगे क्या हो सकता है?
SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट आने के बाद सरकार आगे की कार्रवाई तय करेगी।
संभावित कदम:
- एफआईआर दर्ज हो सकती है।
- दोषियों की गिरफ्तारी संभव।
- सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव।
- डिजिटल मॉनिटरिंग को मजबूत करना।
- दान गिनती प्रक्रिया में नई पारदर्शी व्यवस्था लागू करना।
निष्कर्ष
राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे की राशि से जुड़ी किसी भी अनियमितता की निष्पक्ष जांच अत्यंत आवश्यक है। SIT की जांच से जो भी तथ्य सामने आएंगे, वे न केवल दोषियों की जवाबदेही तय करेंगे बल्कि मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता और श्रद्धालुओं के विश्वास को भी मजबूत करेंगे।
राम मंदिर में दानपात्रों से प्राप्त चढ़ावे की राशि और कीमती वस्तुओं में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद यह मामला सामने आया है।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) इस मामले की जांच कर रहा है।
13 जून 2026 को उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय SIT का गठन किया था।
हाँ, SIT ने ट्रस्ट के कई अधिकारियों और कर्मचारियों से पूछताछ की है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।

