नीरज चोपड़ा की दमदार वापसी: दोहा डायमंड लीग में चौथा स्थान, कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का टिकट पक्का
भारतीय भाला फेंक स्टार नीरज चोपड़ा ने लंबे समय तक चोट से जूझने के बाद दोहा डायमंड लीग 2026 में शानदार वापसी की है। करीब नौ महीने बाद किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में उतरते हुए नीरज ने 85.69 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो फेंका और प्रतियोगिता में चौथा स्थान हासिल किया। हालांकि वह पदक जीतने से चूक गए, लेकिन इस प्रदर्शन ने उनके लिए एक बड़ी राहत की खबर दी—उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए क्वालिफिकेशन हासिल कर लिया है।
इंजरी के बाद पहली प्रतियोगिता में दिखा पुराना आत्मविश्वास
सितंबर 2025 के बाद यह नीरज चोपड़ा का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय इवेंट था। पीठ की चोट के कारण वह लंबे समय तक मैदान से दूर रहे और रिकवरी प्रक्रिया से गुजरते रहे।
दोहा में उन्होंने अपने अभियान की शुरुआत फाउल थ्रो से की, लेकिन इसके बाद 82.77 मीटर, 85.69 मीटर और 83.45 मीटर के प्रयासों के जरिए शानदार वापसी का संकेत दिया। अंतिम प्रयास में भी उनका थ्रो फाउल रहा।
विशेषज्ञों के अनुसार, दूरी भले ही उनके सर्वश्रेष्ठ स्तर से कम रही हो, लेकिन तकनीकी रूप से यह प्रदर्शन काफी सकारात्मक माना जा रहा है।
दोहा डायमंड लीग 2026 में किसने जीता स्वर्ण?
दोहा डायमंड लीग के पुरुष भाला फेंक मुकाबले में श्रीलंका के युवा खिलाड़ी रुमेश पथिरागे ने 88.68 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता।
टॉप-4 खिलाड़ियों का प्रदर्शन
| रैंक | खिलाड़ी | देश | सर्वश्रेष्ठ थ्रो |
|---|---|---|---|
| 1 | रुमेश पथिरागे | श्रीलंका | 88.68 मीटर |
| 2 | एंडरसन पीटर्स | ग्रेनाडा | 86.38 मीटर |
| 3 | कर्टिस थॉमसन | अमेरिका | 85.99 मीटर |
| 4 | नीरज चोपड़ा | भारत | 85.69 मीटर |
यह नतीजा दर्शाता है कि विश्व भाला फेंक में प्रतिस्पर्धा पहले से कहीं अधिक मजबूत हो चुकी है।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए क्वालिफिकेशन हुआ पक्का
एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए 82.61 मीटर का क्वालिफिकेशन मानक निर्धारित किया था।
नीरज ने अपने दूसरे प्रयास में 82.77 मीटर का थ्रो फेंककर इस मानक को पार कर लिया। इसके साथ ही ग्लासगो में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में उनकी भागीदारी लगभग तय हो गई है।
चोट के कारण उनकी उपलब्धता पर सवाल उठ रहे थे, लेकिन दोहा के प्रदर्शन ने सभी आशंकाओं को समाप्त कर दिया।
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पर होगी नजर
नीरज चोपड़ा 2018 के गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। वहीं 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में चोट के कारण वह हिस्सा नहीं ले पाए थे।
अब 2026 में उनका लक्ष्य एक बार फिर भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना होगा। हालांकि इस बार उन्हें एंडरसन पीटर्स और रुमेश पथिरागे जैसे मजबूत खिलाड़ियों से कड़ी चुनौती मिलने वाली है।
क्या नीरज फिर से 90 मीटर क्लब में पहुंच पाएंगे?
नीरज चोपड़ा का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 90.23 मीटर है, जो उन्हें दुनिया के सबसे बेहतरीन जेवलिन थ्रोअर्स में शामिल करता है।
दोहा में 85.69 मीटर का थ्रो यह संकेत देता है कि वह धीरे-धीरे अपनी पुरानी लय में लौट रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले यूरोपियन और एशियाई प्रतियोगिताओं में वह 88-90 मीटर के आंकड़े के करीब पहुंच सकते हैं।
भारतीय एथलेटिक्स के लिए क्यों महत्वपूर्ण है नीरज की वापसी?
नीरज चोपड़ा सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं बल्कि भारतीय खेल जगत की सबसे बड़ी प्रेरणाओं में से एक हैं। टोक्यो ओलंपिक स्वर्ण पदक, विश्व चैंपियनशिप खिताब और लगातार अंतरराष्ट्रीय सफलताओं ने उन्हें देश का सबसे लोकप्रिय एथलीट बना दिया है।
उनकी वापसी भारतीय एथलेटिक्स के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है, खासकर ऐसे समय में जब भारत अगले बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की तैयारी कर रहा है।
निष्कर्ष
दोहा डायमंड लीग 2026 में चौथा स्थान हासिल करने के बावजूद नीरज चोपड़ा का प्रदर्शन भारतीय खेल प्रेमियों के लिए उत्साहजनक रहा। उन्होंने न केवल कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए क्वालिफाई किया बल्कि यह भी दिखाया कि चोट से उबरने के बाद वह फिर से विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार हैं।
अब सभी की निगाहें ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स और आगामी डायमंड लीग प्रतियोगिताओं पर होंगी, जहां नीरज एक बार फिर भारत को गौरवान्वित करने की कोशिश करेंगे।
नीरज चोपड़ा ने 85.69 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ चौथा स्थान हासिल किया।
हाँ, उन्होंने 82.77 मीटर का थ्रो फेंककर AFI के क्वालिफिकेशन मानक को पार कर लिया।
श्रीलंका के रुमेश पथिरागे ने 88.68 मीटर के थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीता।
वह लगभग 9 महीने बाद किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में लौटे।
कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का आयोजन ग्लासगो, स्कॉटलैंड में होगा।

