एमपी में कांग्रेस और सपा के विवाद के बाद राजस्थान में रालोद के साथ भी हो सकता है सीट बंटवारे पर कांग्रेस का विवाद, जयंत ने दोनों पार्टियों के विवाद पर नहीं की कोई भी टिप्पणी
इंडिया गठबंधन के दो प्रमुख दल कांग्रेस और सपा के बीच मध्यप्रदेश में सीट बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद के बाद से कांग्रेस और सपा एक दूसरे को तज्जबों नहीं दे रहे हैं। दोनों ने एक दूसरे के सामने अपने अपने प्रत्याशी उतार दिए हैं। इसके बाद दोनों पार्टियों में तीखी बयानबाजी का दौर चला। अब दोनों पार्टियों को समझाने की कोशिश का दौर चालू है। एमपी में कांग्रेस और सपा के विवाद के बाद अब सब की निगाहें राजस्थान पर टिकी हैं। राजस्थान में 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने रालोद के साथ भरतपुर और मालपुरा दो सीटों पर गठबंधन किया था। इस बार जयंत चौधरी ने राजस्थान में 4 से 5 सीटों की मांग की है।
अभी हाल ही में कांग्रेस ने राजस्थान में 33 सीटों के लिए प्रत्याशियों की सूची जारी की थी। लेकिन इस सूची में उन सीटों को शामिल नहीं किया गया जिन पर 2018 में रालोद के प्रत्याशी चुनाव लड़े थे। हालांकि रालोद प्रमुख जयंत चौधरी अपनी मंशा पहले ही जाहिर कर चुके हैं कि उनकी पार्टी इस बार और ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। जयंत चौधरी ने पिछले दिनों कहा था कि कांग्रेस उनको उन सीटों को दे दे जिन पर कांग्रेस के प्रत्याशी लगातार हार का सामना करते रहे हैं। रालोद उन सीटों पर जीत कर दिखाएगी।
जयंत चौधरी ने कहा सभी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे
रालोद प्रमुख जयंत चौधरी ने हाल ही में कहा था कि उनकी पार्टी सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। हालाँकि इसके बाद जयंत चौधरी ने स्पष्ट किया कि हम केबल उन सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते हैं जिन सीटों पर कांग्रेस और रालोद का गठबंधन मजबूती के साथ उभरा है। जयंत चौधरी ने कहा कि पिछली बार दो सीटों पर गठबंधन हुआ था लेकिन इस बार हम ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते हैं। इस बार हम चाहते हैं कि गठबंधन ज्यादा सीटों पर हो। लेकिन कांग्रेस की तरफ से जयंत चौधरी की मांग पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आयी है। ऐसे में ऐसा माना जा रहा है कि दोनों दलों ने एमपी में हुए सपा और कांग्रेस के विवाद को देखते हुए मामले को सावधानी के साथ निपटाने का फैसला लिया है। ऐसा माना जा रहा है कि राजस्थान में जाट मतों के आधार पर रालोद राजस्थान में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करना चाहती है। हालाँकि एमपी में हुए सपा और कांग्रेस के विवाद पर रालोद प्रमुख जयंत चौधरी की तरफ से कोई टिप्पणी नहीं आयी है।
राजस्थान में कांग्रेस दोबारा से सत्ता में वापिसी की कोशिश में है। ऐसे में कांग्रेस की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा विधायक उनके चुनाव चिन्ह पर जीत कर विधानसभा पहुंचे। जिससे सरकार बनाने में उसे किसी के सहारे की जरूरत न पड़े। कांग्रेस अभी खुद अंतर्कलह और कथित गुटबाजी से जूझ रही है ऐसे में वह रालोद के साथ गठबंधन को किस मोड़ पर पहुंचाएगी यह देखना दिलचस्प होगा।
