असदुद्दीन ओवैसी का यूसीसी को लेकर वयान कहा हम पर थोपा जा रहा है यूसीसी
यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर जो चर्चा चल रही है उसी चर्चा बीच एआईएमआईएम के चीफ और सांसद असदद्दीन ओवेसी ने फिर से इसे लेकर अपनी बात रखी है। उन्होंने शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमे उन्होंने कहा कि हमने लॉ कमीशन को अपना रेस्पोंसे और उसके साथ रिटायर्ड जस्टिस गोपाल गौड़ा का लीगल ओपिनियन भी भेजा है। उन्होंने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट के वकील निजाम पाशा ने इसे तैयार करने में मदद की थी। ओवेसी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में लॉ कमीशन के नोटिफिकेशन पर भी सवाल खड़े किये, उन्होंने कहा कि लॉ कमीशन ने यूसीसी पर लोगो के विचार पूछे हैं, कोई प्रपोसल नहीं दिया है। ओवेसी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लॉ कमीशन पांच साल बाद फिर से यूसीसी पर एक्सरसाइज कर रहा है। हर चुनाव से पहले यही होता है जिससे बीजेपी को चुनाव में फायदा मिल सके।
असदद्दीन ओवेसी ने कहा कि यह एक पॉलिटिकल एक्सरसाइज है। ऐसा इसलिए है कि आने वाले लोकसभा चुनाव में जनता का ध्यान महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी और चीन जैसे मुद्दों से हट जाये। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में यूसीसी को लागू करने के लिए जो कमेटी बनायीं गयी है, वो सीधा संविधान आर्टिकल 44 का उल्लघन है।
असदद्दीन ओवेसी ने आगे कहा कि इस्लाम में महिलाओं को ज्यादा अधिकार हासिल हैं। इस्लाम में शादी के लिए कबूल है बोलते हैं। लेकिन हिन्दुओं में ऐसा नहीं है। जब रिचुअल पूरा होता है तब शादी पूरी मानी जाती है। उन्होंने कहा मुस्लिम पर्सनल लॉ में महिलायों को शादी टूटने पर ज्यादा अधिकार हासिल हैं। इस्लाम में सबसे पहले महिलाओं को प्रॉपर्टी में हिस्सा दिया जाता है। इस्लाम में महिला को पति और पिता दोनों से प्रॉपर्टी मिलती है। इस्लाम में बीबी की कमाई पर पति का कोई हक़ नहीं होता है। लेकिन हिन्दू महिलाओं को यह सब हासिल नहीं है।
हम पर थोपा जा रहा है – ओवेसी
ओवेसी ने कहा कि यूसीसी पर चल रही चर्चा बहुसंख्यक समुदाय के विचारों को थोपने का प्रयास है। उन्होंने लॉ कमीशन से गुजारिश करते हुए कहा कि वो पॉलिटिकल प्रोपोगंडा का हिस्सा न बने। उन्होंने उत्तराखंड राज्य को लेकर कहा कि रिटायर्ड जस्टिस गोपाल गौड़ा के मुताबिक उत्तराखंड यूसीसी नहीं बना सकता है। ओवेसी ने दावा किया कि उत्तराखंड का यूसीसी अदालतों में कानूनी रूप से मान्य नहीं हो सकता है।
