सीएम योगी की संवेदनशील पहल: 43 दिनों में 8,180 जरूरतमंदों को 153 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद
उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बार फिर यह साबित किया है कि गरीब, बीमार और संकट में फंसे लोगों के लिए वह सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं, बल्कि जमीन पर काम करती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में नए वित्तीय वर्ष 2025-26 की शुरुआत में ही महज 43 दिनों के भीतर 8,180 जरूरतमंदों को कुल 1.53 अरब रुपये (करीब 153 करोड़ रुपये) की आर्थिक सहायता दी गई है।
यह आर्थिक सहायता सीधे उन लोगों तक पहुंचाई गई है जो गंभीर बीमारियों, बेटी की शादी, दुर्घटना या किसी अन्य आपदा के कारण आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। योगी सरकार की इस त्वरित सहायता व्यवस्था ने एक बार फिर लोगों का विश्वास जीता है।
मुख्यमंत्री ने लिया खुद संज्ञान
प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से मिलने वाले जनता दर्शन, जनप्रतिनिधियों द्वारा भेजे गए आवेदन पत्र और पीड़ित परिवारों द्वारा भेजे गए प्रार्थना पत्रों पर स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंभीरता से संज्ञान लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जरूरतमंदों को बिना देर किए तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जाए।
योगी सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी पीड़ित व्यक्ति इलाज या अन्य आवश्यक जरूरतों से वंचित न रह जाए।
सबसे ज्यादा मदद इलाज के लिए
इस 43 दिन की अवधि में सबसे अधिक सहायता इलाज के लिए दी गई। गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या बड़ी थी, जिनमें खासकर कैंसर, किडनी और हृदय रोग प्रमुख थे।
- 875 कैंसर मरीजों को ₹21.23 करोड़ की मदद दी गई।
- 246 किडनी रोगियों को ₹4.2 करोड़ की सहायता दी गई।
- 98 हृदय रोगियों को ₹1.46 करोड़ की आर्थिक मदद दी गई।
इन सभी मामलों में मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से यह सहायता दी गई, जिससे लोगों को समय रहते इलाज मिल सके और उनकी जान बचाई जा सके।
अन्य मदद भी प्रभावी रही
सरकार ने सिर्फ बीमारों की मदद नहीं की, बल्कि अन्य सामाजिक आवश्यकताओं पर भी ध्यान दिया।
- 20 परिवारों को बेटियों की शादी के लिए ₹24 लाख की सहायता प्रदान की गई।
- 5 मृतक आश्रित परिवारों को ₹32 लाख की राहत दी गई।
- 236 अन्य जरूरतमंदों को कुल ₹4.07 करोड़ की सहायता दी गई।
इस प्रकार, योगी सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया कि उनकी योजनाएं सिर्फ कागजों में नहीं, बल्कि लोगों की वास्तविक जरूरतों के अनुसार लागू होती हैं।
पारदर्शी और तेज़ प्रक्रिया
मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से मिलने वाली सहायता प्रक्रिया को पारदर्शिता और त्वरित निर्णय के सिद्धांतों पर चलाया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जो भी पात्र व्यक्ति सहायता के लिए आवेदन करे, उसका निस्तारण जल्द से जल्द किया जाए।
इसमें किसी तरह की देरी या भेदभाव की गुंजाइश नहीं छोड़ी गई। मुख्यमंत्री खुद हर दिन जनता से मिलकर उनकी समस्याएं सुनते हैं और उन्हें प्राथमिकता से सुलझाते हैं।
संवेदनशीलता और सेवा भाव का उदाहरण
उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि सरकार की संवेदनशीलता और सेवा भावना का प्रतीक है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल से यह संदेश गया है कि जरूरतमंदों की सहायता में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी।
नए वित्तीय वर्ष के शुरुआती 43 दिन यह साबित करने के लिए पर्याप्त हैं कि प्रदेश सरकार हर जरूरतमंद के साथ खड़ी है। आने वाले समय में भी इसी तरह की पारदर्शी और असरदार सहायता से प्रदेश की जनता को राहत मिलती रहेगी, इसकी उम्मीद की जा रही है।
