दिशा सालियान केस पर नारायण राणे का बड़ा दावा: कहा ‘यह हत्या थी, एसआईटी की रिपोर्ट नहीं मानता’
केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता नारायण राणे ने एक बार फिर से दिशा सालियान मौत मामले को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की उस रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें दिशा की मौत को आत्महत्या बताया गया था। राणे ने कहा, “मैं 101 टक्के मानता हूं कि दिशा सालियान की हत्या हुई थी। अगर यह आत्महत्या थी, तो डॉक्टर को क्यों बदला गया? अस्पताल के कर्मचारियों को क्यों हटाया गया?”
नारायण राणे के इस बयान के बाद यह मामला एक बार फिर से राजनीतिक हलकों में गर्मा गया है। उन्होंने साफ तौर पर संकेत दिए हैं कि उन्हें एसआईटी की रिपोर्ट पर कोई भरोसा नहीं है और उन्होंने यह मुद्दा फिर से उठाकर विपक्ष को घेरने की कोशिश की है।
एसआईटी की रिपोर्ट पर नारायण राणे की आपत्ति
एसआईटी द्वारा अपनी जांच में यह निष्कर्ष निकाला गया था कि दिशा सालियान ने आत्महत्या की थी। लेकिन राणे इससे बिल्कुल भी सहमत नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाए कि आखिर मेडिकल टीम को क्यों बदला गया, और कई लोगों को उस समय के बाद पद से हटाया गया — क्या यह सब एक सामान्य आत्महत्या के मामले में होता है?
राणे का कहना है कि दिशा सालियान की मौत में कई अनसुलझे सवाल हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके इस बयान से यह साफ है कि बीजेपी इस केस को फिर से राजनीतिक मुद्दा बना सकती है।
बालासाहब ठाकरे को बताया ‘ब्रांड’
प्रेस से बातचीत के दौरान राणे ने शिवसेना के संस्थापक बालासाहब ठाकरे को लेकर भी बड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि “बालासाहब ठाकरे एक ब्रांड थे। उनके बाद कोई दूसरा ऐसा ब्रांड नहीं हुआ। उनका नाम ही काफी था।”
उन्होंने कहा कि बालासाहब का “ब्रांड रजिस्ट्रेशन” नहीं किया जा सकता क्योंकि वो एक विचारधारा और पहचान थे, जिन्हें लोग आज भी श्रद्धा से याद करते हैं।
राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की नजदीकियों पर प्रतिक्रिया
नारायण राणे ने राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की हाल की मुलाकात पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, “राज और उद्धव का एक साथ आना, दो भाइयों का मिलन जरूर है, लेकिन यह भावनात्मक नहीं, बल्कि राजनीतिक समझौता है।”
उनका इशारा साफ था कि एमएनएस और यूबीटी शिवसेना का यह गठबंधन अवसरवादी है और केवल चुनावी फायदे के लिए हो रहा है।
उन्होंने आगे कहा कि “राज ही बता सकते हैं कि बीते 19 सालों में उनके और उद्धव के बीच क्या हुआ। राजनीति में ऐसे समझौते समय-समय पर होते रहते हैं, लेकिन यह भावनात्मक नहीं होते।”
उद्धव ठाकरे पर सीधा हमला
राणे ने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने पूछा कि जब उद्धव मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने मराठी समाज के लिए क्या ठोस काम किया? राणे का आरोप है कि उद्धव सरकार ने केवल गठबंधन की राजनीति की और मराठी जनता की वास्तविक जरूरतों की अनदेखी की।
उनका यह बयान सीधे तौर पर शिवसेना (यूबीटी) पर हमला था, जिससे यह समझा जा रहा है कि बीजेपी आने वाले चुनावों से पहले उद्धव ठाकरे की नेतृत्व क्षमता को कठघरे में खड़ा करना चाहती है।
राजनीतिक रणनीति के संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नारायण राणे के यह बयान बीजेपी की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। दिशा सालियान केस को एक बार फिर उठाकर वह विपक्षी दलों, खासकर उद्धव गुट को असहज स्थिति में लाना चाहते हैं।
इसके साथ ही, राज और उद्धव ठाकरे की बढ़ती निकटता को राजनीतिक गठबंधन के रूप में प्रस्तुत कर बीजेपी यह दर्शाना चाहती है कि यह मेलभावनात्मक नहीं, बल्कि राजनीतिक फायदे के लिए है।
नारायण राणे के ताजा बयानों ने एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। जहां एक तरफ उन्होंने दिशा सालियान केस को लेकर एसआईटी रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं दूसरी तरफ ठाकरे परिवार और शिवसेना की राजनीति पर भी कटाक्ष किया है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह मुद्दा चुनावी माहौल को प्रभावित करेगा या नहीं।
