May 19, 2026

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रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी टैरिफ की धमकी, भारत ने दी संयमित प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से व्यापार करने वाले देशों के खिलाफ बड़ा कदम उठाने की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि यदि कोई देश रूस से सामान खरीदता है और यूक्रेन की मदद नहीं करता है, तो उसके उत्पादों पर अमेरिका में 500 प्रतिशत तक टैरिफ (आयात शुल्क) लगाया जाएगा। इस धमकी के बाद भारत सहित कई देशों की चिंता बढ़ गई है, जो अब भी रूस से ऊर्जा या अन्य सामान आयात कर रहे हैं।

क्या कहा विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने?

अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा प्रस्तावित बिल और अमेरिकी कांग्रेस में इसकी संभावित चर्चा हमारे लिए महत्त्वपूर्ण है। यदि यह भारत के हितों को प्रभावित करता है या कर सकता है, तो हम इसे गंभीरता से लेंगे।”

जब उनसे पूछा गया कि यदि ट्रंप की धमकी के अनुसार भारत पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया तो भारत की प्रतिक्रिया क्या होगी, इस पर जयशंकर ने कहा, “हम सीनेटर ग्राहम के संपर्क में हैं। हमने उन्हें भारत की ऊर्जा सुरक्षा और हमारे रणनीतिक हितों के बारे में जानकारी दे दी है। अभी इस पर कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाज़ी होगी। जब यह स्थिति सामने आएगी, तभी हम उचित कदम उठाएंगे।”

सीनेटर लिंडसे ग्राहम का क्या कहना है?

इस पूरे विवाद की जड़ अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम का वह बयान है, जिसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप रूस से व्यापार जारी रखने वाले देशों पर भारी-भरकम टैक्स लगाने के पक्ष में हैं। उन्होंने अमेरिकी मीडिया चैनल एबीसी न्यूज से बातचीत में कहा,
“जो देश रूस से सामान खरीद रहे हैं और यूक्रेन की सहायता नहीं कर रहे हैं, उनके उत्पादों पर अमेरिका में 500 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाया जाएगा। भारत और चीन, दोनों ही रूस से भारी मात्रा में तेल खरीद रहे हैं, जिससे पुतिन की युद्ध मशीन को ताकत मिल रही है।”

भारत के लिए क्या हो सकता है असर?

रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद, विशेष रूप से फरवरी 2022 के बाद, भारत ने अपने कच्चे तेल आयात में बड़ा बदलाव किया। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और छूटों के चलते भारत ने रूस से सस्ती दरों पर कच्चा तेल खरीदना शुरू किया। एक समय ऐसा था जब भारत केवल 1 प्रतिशत कच्चा तेल रूस से आयात करता था, लेकिन अब यह आंकड़ा 40-44 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

मई 2025 के आंकड़ों के अनुसार, भारत प्रतिदिन औसतन 1.96 मिलियन बैरल तेल रूस से आयात कर रहा है। इस सस्ते तेल ने भारत को ऊर्जा क्षेत्र में राहत पहुंचाई है और आर्थिक स्तर पर भी फायदेमंद रहा है।

आगे की राह क्या?

भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखकर निर्णय लेता है। पश्चिमी दबावों के बावजूद भारत ने हमेशा रणनीतिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है। यदि अमेरिका ट्रंप के नेतृत्व में ऐसे सख्त कदम उठाता है तो भारत को आर्थिक और कूटनीतिक दोनों ही मोर्चों पर नई रणनीति बनानी पड़ सकती है।

हालांकि फिलहाल यह प्रस्ताव अमेरिकी कांग्रेस में केवल एक बिल के रूप में पेश किया गया है और इसकी मंजूरी की प्रक्रिया अभी बाकी है। भारत इस मुद्दे पर सावधानी से आगे बढ़ रहा है और अमेरिका के साथ अपने हितों की रक्षा के लिए लगातार बातचीत कर रहा है।

रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिकी आयात शुल्क की धमकी के बाद भारत ने संयमित लेकिन स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा है कि भारत अपने हितों की रक्षा करना जानता है और वह अमेरिका के साथ सभी मुद्दों पर संवाद बनाए हुए है। अब देखने वाली बात यह होगी कि अमेरिकी कांग्रेस इस बिल को मंजूरी देती है या नहीं और उसका वैश्विक व्यापार पर क्या असर पड़ता है।

 

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