चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में सीजेआई की भूमिका ख़त्म करने वाले बिल पर विपक्ष का कड़ा विरोध, ममता बनर्जी ने कहा माई लार्ड देश को बचा लो
केंद्र सरकार ने राज्यसभा में मुख्य निर्वाचन आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के चयन सम्बंधित बिल 10 अगस्त गुरुवार को पेश किया है। इस बिल को लेकर सभी विपक्षी दल केंद्र सरकार का कड़ा विरोध कर रहे हैं। इस विरोध में अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
ममता बनर्जी ने आज शनिवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए और इस बिल का विरोध करते हुए कहा कि बीजेपी अराजकता के आगे झुक गयी है। इस हफ्ते सीईसी की नियुक्ति के लिए तीन सदस्यीय पैनल में सीजेआई की भूमिका महत्तपूर्ण है। हम चुनाव आयुक्त के चयन में सीजेआई की जगह कैबिनेट मंत्री को लाने का कड़ा विरोध करते हैं।
ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति से सीजेआई को नियुक्ति पैनल से बाहर करना बीजेपी की बैचेनी को दर्शाता है। जो कि बताती है कि वोट हेरफेर को नुकसान हो सकता है। हम भारत की न्यायपालिका से अपील करते हैं “माई लार्ड हमारे देश को बचाइऐ। ”
बिल का प्रावधान क्या है
इस विधेयक में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के चयन की नियुक्ति पैनल में भारत के चीफ जस्टिस की जगह एक कैबिनेट मंत्री को शामिल करने का प्रावधान है। जिससे पोल पैनल के सदस्यों की नियुक्ति में सरकार को अधिक नियंत्रण प्राप्त करने की अनुमति मिलेगी। राज्यसभा में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इस विधेयक 2023 को पेश किया।
इस बिल के विरोध में कई विपक्षी दल सामने आये। इस बिल का विरोध कांग्रेस, तृणमूल, आप और वाम दलों सहित अन्य विपक्षी दलों ने भी किया। बिल पेश करने के समय भी विपक्ष ने सदन में खूब हंगामा किया। विपक्ष ने बीजेपी पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के आदेश को कमजोर करने और पलटने का आरोप लगाया।
