अयोग्य विधायक मामले में स्पीकर राहुल नार्वेकर की तरफ से हो रही देरी को लेकर सुप्रीमकोर्ट नाराज, एनसीपी शिवसेना यू और कोंग्रस ने साधा निशाना
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और कई विधायकों की अयोग्यता के फैसले को लेकर स्पीकर राहुल नार्वेकर की तरफ से हो रही देरी को लेकर सुप्रीमकोर्ट ने नाराजगी जताई है। सुप्रीमकोर्ट की नाराजगी के बाद से इस मामले में बयानवाजी शुरू हो गयी है। इस मामले को लेकर एनसीपी, शिवसेना यू और कांग्रेस ने स्पीकर राहुल नार्वेकर पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि नार्वेकर जानबूझ कर देरी कर रहे हैं। उन्हें इसके लिए समयसीमा तय करनी चाहिए।
विधयक अयोग्यता मामले को लेकर एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि याचिकाओं पर निर्णय लेने में विधानसभा अध्यक्ष की ओर से देरी हो रही थी इस लिए उन्हें सुप्रीमकोर्ट का रुख करना पड़ा। उन्होंने कहा ”निर्देश दिया जाना चाहिए कि निर्णय एक तय समय-सीमा के भीतर लिया जाए। इसमें विलंब नहीं किया जा सकता है। यही रुख शिवसेना का भी है।”
दरअसल विधायकों की अयोग्यता के फैसले पर विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से देरी हो रही थी, इस पर सुप्रीमकोर्ट ने कल शुक्रवार को कहा कि इस मामले को अगले चुनाव तक नहीं लटकाया जा सकता है। हम इस अगले 2 महीने में निपटारे का आदेश देंगे। आप हमारे आदेशों को विफल नहीं कर सकते हैं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई मंगलवार तक के लिए टाल दी है।
क्या है अयोग्य विधायक मामला
दरअसल सुनील प्रभु ने पिछले साल मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और 15 बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की याचिका दायर की थी। इस साल जुलाई में एनसीपी नेता अजित पवार और 8 विधायक महाराष्ट्र की बीजेपी और शिवसेना एस के नेतृत्व वाली एकनाथ शिंदे की सरकार में शामिल हो गए। जिसमे अजित पवार को डिप्टी सीएम बनाया गया। जिसके बाद शरद पवार ने अजित पवार और उन आठ विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए स्पीकर राहुल नार्वेकर के समक्ष याचिका दायर की। जिसके बाद अजित पवार ने भी शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की याचिका दायर की।
सुप्रीमकोर्ट की टिप्पणी
सुप्रीमकोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली पीठ ने आदेश दिया ‘‘किसी को विधानसभा अध्यक्ष को यह सलाह देनी होगी कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी नहीं कर सकते।” कोर्ट ने 18 सितंबर को महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष को निर्देश दिया था कि शिंदे और अन्य विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं पर फैसले के लिए समयसीमा बतायें।
कांग्रेस ने साधा निशाना
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा, ”सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के खिलाफ फिर से सख्त आदेश दिया है, जिससे पता चलता है कि वह जानबूझकर डेढ़ साल पहले हुए शिवसेना विभाजन पर फैसले में देरी कर रहे हैं।”

