May 17, 2026

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कांग्रेस पार्टी ने किया आम आदमी पार्टी का सपोर्ट, केंद्र सरकार और आम आदमी पार्टी के बीच चल रहे घमासान में

दिल्ली में नियुक्तियों और तबादलों पर केंद्र सरकार के अध्यादेश के विरुद्ध में आम आदमी पार्टी को कांग्रेस पार्टी का भी सपोर्ट मिल गया है। कोंग्रस पार्टी के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने सोमवार को कहा कि कांग्रेस पार्टी दिल्ली सरकार के अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आम आदमी पार्टी के साथ है। इससे पहले बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार भी इस फैसले के लिए आम आदमी पार्टी के सपोर्ट की बात कह चुके हैं। नितीश कुमार के बाद सोमवार को कोंग्रस ने भी आम आदमी पार्टी का सपोर्ट कर दिया है।

संसद में केंद्र सरकार के अध्यादेश का विरोध करेगी कांग्रेस

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के अध्यक्ष खरगे ने कहा है कि कोंग्रस पार्टी राज्य सरकार के अधिकारों के पक्ष में है। खरगे ने आगे कहा कि दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने सिमित अधिकारों के साथ भी दिल्ली में 15 सालों तक कामयाबी से सरकार चलायी। लेकिन केजरीवाल सरकार चलने से ज्यादा टकराव पर ज्यादा ध्यान देते हैं। लेकिन फिर भी कांग्रेस संसद में केंद्र सरकार के अध्यादेश का विरोध करेगी।

केजरीवाल विपक्ष के नेताओं से मुलाकात करेंगे

केजरीवाल ने कहा है कि वह विपक्षी दलों के नेताओं से व्यक्तिगत तौर पर मुलाकात करेंगे। ताकि केंद्र सरकार के द्वारा राज्य सरकारों के लिए लाये जाने वाले अध्यादेश को राजयसभा में पारित होने से रोका जा सके। केजरीवाल ने आगे कहा कि उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार से इस सम्बन्ध में विपक्ष के नेताओं से बात करने को कहा है।

नितीश कुमार ने केजरीवाल को आश्वासन देते हुए कहा कि केंद्र सरकार किसी भी राज्य में निर्वाचित सरकार की शक्ति को कैसे छीन सकती है। नितीश कुमार ने कहा केजरीवाल जो भी कुछ कर रहे हैं वह सही कर रहे हैं। हम इस फैसले में केजरीवाल के साथ हैं। और सभी विपक्षी दलों को अरविन्द केजरीवाल का साथ देने के लिए एकजुट करने का प्रयास करेंगे।

केंद्र सरकार द्वारा जारी अध्यादेश

केंद्र सरकार ने दिल्ली में ग्रुप ए के अधिकारीयों के तबादले और उनके खिलाप अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए राष्ट्रिय राजधानी लोक सेवा प्राधिकरण गठित करने के उद्देश्य से शुक्रवार को एक अध्यादेश जारी किया था। अध्यादेश जारी होने के महज एक हफ्ते पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में पुलिस, कानून व्यवस्था और भूमि को छोड़ कर अन्य सभी सेवाओं का नियंत्रण दिल्ली की सरकार को सौंप दिया था।

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