पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान शांति वार्ता बेनतीजा, 21 घंटे की बातचीत भी नहीं ला सकी समाधान
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता से कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया। यह बातचीत काफी लंबे समय तक चली, लेकिन दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद मौजूद नहीं थे, फिर भी वे लगातार वार्ता में शामिल अपनी टीम के संपर्क में बने रहे।
इस वार्ता का नेतृत्व अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वैंस कर रहे थे। उन्होंने बताया कि बातचीत के दौरान कई बार उन्होंने ट्रंप से चर्चा की, ताकि हर फैसले में उनकी राय ली जा सके।
21 घंटे तक चली बातचीत, ट्रंप से कई बार हुआ संपर्क
मीडिया से बातचीत में जेडी वैंस ने बताया कि यह शांति वार्ता करीब 21 घंटे तक चली। इस दौरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने लगातार अपने शीर्ष नेतृत्व से संपर्क बनाए रखा। उन्होंने बताया कि पिछले 21 घंटों में उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप से लगभग 6 से 12 बार बात की।
वैंस ने यह भी बताया कि इस वार्ता के दौरान उन्होंने कई वरिष्ठ अधिकारियों से भी चर्चा की, जिनमें ब्रैड कूपर, पीट हेगसेथ, मार्को रुबियो और स्कॉट बेसेंट शामिल थे। पूरी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई थी।
उन्होंने कहा कि अमेरिका पूरी ईमानदारी के साथ इस वार्ता में शामिल हुआ था और एक ऐसा प्रस्ताव तैयार किया गया था, जो दोनों देशों के बीच सहमति बना सके। लेकिन अंत में यह प्रयास सफल नहीं हो सका।
परमाणु हथियार बना सबसे बड़ा मुद्दा
वार्ता के असफल होने के पीछे सबसे बड़ा कारण परमाणु हथियारों को लेकर मतभेद रहा। जेडी वैंस ने बताया कि अमेरिका की मुख्य मांग यह थी कि ईरान साफ तौर पर यह वादा करे कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और न ही ऐसी तकनीक हासिल करेगा जिससे वह जल्दी परमाणु हथियार विकसित कर सके।
उन्होंने कहा कि यह अमेरिका की प्राथमिकता थी और इसी उद्देश्य के साथ यह बातचीत की गई थी। लेकिन ईरान की ओर से इस मुद्दे पर स्पष्ट और ठोस आश्वासन नहीं मिला, जिसके कारण वार्ता आगे नहीं बढ़ सकी।
वैंस ने बातचीत के अन्य पहलुओं पर ज्यादा जानकारी देने से इनकार कर दिया, लेकिन उन्होंने यह जरूर संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच अभी भी भरोसे की कमी है।
आगे क्या?
इस असफल वार्ता के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिका और ईरान के संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं। फिलहाल यह स्पष्ट है कि दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव बना हुआ है।
इस्लामाबाद में हुई यह वार्ता भले ही किसी नतीजे पर नहीं पहुंची, लेकिन इसने यह जरूर दिखा दिया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान खोजने की कोशिशें जारी हैं।
