सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर पीएम मोदी ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर दी श्रद्धांजलि
भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर देशभर में उन्हें याद किया जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के एकता नगर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पहुंचकर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की। 31 अक्टूबर को उनकी जयंती के अवसर पर देश में राष्ट्रीय एकता दिवस भी मनाया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सरदार पटेल के योगदान को याद करते हुए उन्हें अखंड भारत और राष्ट्रीय एकता का प्रमुख शिल्पकार बताया। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने अपना जीवन मजबूत, समृद्ध और सक्षम भारत के निर्माण के लिए समर्पित किया था। उनका त्याग और देशसेवा का भाव आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।
इस अवसर पर गुजरात के एकता नगर में राष्ट्रीय एकता दिवस से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें एकता परेड, शपथ समारोह और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल हैं।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर आयोजित हुआ मुख्य कार्यक्रम
गुजरात के नर्मदा जिले में स्थित एकता नगर में सरदार पटेल की जयंती का मुख्य आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने सुबह करीब 7:15 बजे स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर पुष्पांजलि अर्पित की। यह प्रतिमा सरदार पटेल के सम्मान में बनाई गई है और दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा के रूप में जानी जाती है।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय एकता और देश की अखंडता को बनाए रखने का संकल्प भी शामिल रहा। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय एकता दिवस की शपथ दिलाई। इसके बाद आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में देश के विभिन्न सुरक्षा बलों और पुलिस इकाइयों की भागीदारी रखी गई है।
इस वर्ष समारोह में एकता परेड को विशेष रूप दिया गया है। इसमें अलग-अलग राज्यों की पुलिस, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल और अन्य संस्थाओं के जवान हिस्सा ले रहे हैं। परेड का उद्देश्य देश की सुरक्षा और एकता में इन बलों के योगदान को सामने लाना है।
31 अक्टूबर को क्यों मनाया जाता है राष्ट्रीय एकता दिवस?
सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आजादी के बाद देश के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रियासतों का एकीकरण था।
उस समय भारत में 560 से अधिक रियासतें मौजूद थीं। इन रियासतों को एकजुट कर भारतीय संघ का हिस्सा बनाने में सरदार पटेल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से स्वतंत्र भारत की राजनीतिक एकता मजबूत हुई।
इसी योगदान को सम्मान देने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2014 से 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत की। इसका उद्देश्य लोगों को देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति जागरूक करना है।
इस दिन देशभर में एकता की शपथ, रन फॉर यूनिटी और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। स्कूल, कॉलेज, सरकारी कार्यालय और सामाजिक संस्थाएं भी इन गतिविधियों में भाग लेती हैं।
एकता परेड में पुलिस और सुरक्षा बल दिखाएंगे अपनी ताकत
एकता नगर में आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह का प्रमुख आकर्षण एकता परेड है। इस वर्ष परेड में 9 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश की पुलिस इकाइयों के साथ केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की टुकड़ियां शामिल की गई हैं।
इसके अलावा राष्ट्रीय कैडेट कोर और विभिन्न सुरक्षा संगठनों की भागीदारी भी रखी गई है। परेड में जवानों के अनुशासन, प्रशिक्षण और देश की सुरक्षा में उनके योगदान को प्रदर्शित किया जा रहा है।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड की हेल मार्च टुकड़ी भी विशेष आकर्षण रहेगी। सीमा सुरक्षा बल और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के महिला एवं पुरुष बाइकर्स अपने करतब दिखाएंगे। भारतीय वायुसेना की सूर्य किरण टीम के फ्लाईपास्ट को भी कार्यक्रम में शामिल किया गया है।
इस आयोजन के जरिए सुरक्षा बलों के काम और उनके अनुभवों को आम लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
2,000 कलाकारों की प्रस्तुति में दिखेगा नक्सलवाद से संघर्ष
इस वर्ष के राष्ट्रीय एकता दिवस समारोह में सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी विशेष महत्व दिया गया है। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय करीब 2,000 कलाकारों के साथ एक विशेष नाट्य प्रस्तुति पेश करेगा।
इस प्रस्तुति में उन इलाकों के कलाकार शामिल होंगे, जिन्होंने कभी सशस्त्र नक्सलवाद की समस्या का सामना किया था। ये कलाकार अपने क्षेत्रों में हुए संघर्ष और उसके सामाजिक प्रभावों को मंच के माध्यम से दिखाएंगे।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आए बदलाव को सामने लाना है। आयोजन में उन लोगों को भी आमंत्रित किया गया है, जिन्होंने इन इलाकों में कठिन परिस्थितियों का सामना किया।
इसके अलावा सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और झांकियों की थीम ‘वंदे मातरम्’ रखी गई है। देश के अलग-अलग हिस्सों की कला, संस्कृति और परंपराओं को एक मंच पर दिखाने की तैयारी की गई है।
एकता नगर में 400 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य
राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर गुजरात के एकता नगर में विकास परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस दौरान 400 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन, लोकार्पण और शिलान्यास करने वाले हैं।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य स्टैच्यू ऑफ यूनिटी आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इनमें जल और सीवेज प्रबंधन, नर्मदा घाट का उन्नयन, पर्यटन स्थलों का विकास और अन्य बुनियादी सुविधाएं शामिल हैं।
एकता नगर पिछले कुछ वर्षों में देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हुआ है। यहां स्टैच्यू ऑफ यूनिटी देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में सुविधाओं का विस्तार स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है।
सरकार की योजनाओं में पर्यावरण संरक्षण और क्षेत्र में बेहतर प्रबंधन को भी महत्व दिया जा रहा है।
सरदार पटेल का जीवन और देश के लिए योगदान
सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने कानून की पढ़ाई की और बाद में स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने कई आंदोलनों में भाग लिया।
खेड़ा सत्याग्रह और बारडोली आंदोलन में उनकी भूमिका ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। बारडोली आंदोलन की सफलता के बाद उन्हें ‘सरदार’ की उपाधि मिली।
आजादी के बाद वह भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री बने। इस दौरान उन्होंने रियासतों के एकीकरण और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उनके प्रयासों से देश की राजनीतिक एकता को नई दिशा मिली। इसी कारण उन्हें भारत का लौह पुरुष कहा जाता है। उनका जीवन देशसेवा, प्रशासनिक दृढ़ता और राष्ट्रीय एकता के लिए समर्पण का उदाहरण माना जाता है।
निष्कर्ष
सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर एकता परेड, शपथ समारोह और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। सरदार पटेल ने आजादी के बाद 560 से अधिक रियासतों को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई थी। उनकी जयंती पर होने वाले ये आयोजन देश की एकता, अखंडता और सामूहिक जिम्मेदारी के संदेश को आगे बढ़ाते हैं।

