GRAP-1 का असर! दिल्ली मेट्रो में एक दिन में 80.5 लाख बोर्डिंग दर्ज
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण और वाहनों पर लागू पाबंदियों के बीच सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ गया है। इसका असर दिल्ली मेट्रो में भी दिखाई दिया। 2 नवंबर 2026 को मेट्रो में कुल 80.54 लाख यात्री बोर्डिंग दर्ज की गईं। यह आंकड़ा पिछले सोमवार के मुकाबले करीब 8.30 लाख ज्यादा है।
दिल्ली मेट्रो में यात्रियों की बढ़ती संख्या ऐसे समय सामने आई है, जब राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण के लिए GRAP के उपाय लागू हैं। इसके साथ ही कुछ पुराने और कम उत्सर्जन मानकों वाले बाहरी वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर भी रोक लगाई गई है। यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने अतिरिक्त ट्रेन सेवाएं भी शुरू की हैं।
दिल्ली मेट्रो में 80.54 लाख बोर्डिंग का आंकड़ा
दिल्ली मेट्रो के आंकड़ों के मुताबिक, 2 नवंबर को कुल 80,54,968 बोर्डिंग दर्ज की गईं। इससे पिछले सोमवार को यह आंकड़ा 72,24,094 था। इस तरह एक सप्ताह में बोर्डिंग की संख्या में 8,30,874 की बढ़ोतरी हुई।
यह संख्या दिल्ली मेट्रो के अब तक के सबसे बड़े दैनिक आंकड़ों के करीब पहुंच गई है। सितंबर 2026 में मेट्रो ने एक दिन में 82.44 लाख यात्री यात्राओं का रिकॉर्ड दर्ज किया था। उस समय दिल्ली परिवहन निगम के बस चालकों की हड़ताल के कारण मेट्रो पर यात्रियों का दबाव बढ़ा था।
आमतौर पर दिल्ली मेट्रो में प्रतिदिन करीब 64 लाख यात्री यात्राएं दर्ज होती हैं। ऐसे में 80 लाख से ज्यादा बोर्डिंग का आंकड़ा राजधानी में सार्वजनिक परिवहन की बढ़ती मांग को दिखाता है।
यहां एक बात समझना जरूरी है। बोर्डिंग का मतलब अलग-अलग यात्रियों की कुल संख्या नहीं है। मेट्रो में एक यात्री अगर अपनी मंजिल तक पहुंचने के लिए लाइन बदलता है, तो उसकी यात्रा एक से ज्यादा बार गिनी जा सकती है।
GRAP-1 और वाहनों पर पाबंदियों का असर
दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने के बाद 21 अक्टूबर 2026 को GRAP का पहला चरण लागू किया गया था। इसके तहत प्रदूषण कम करने के लिए कई कदम उठाए गए। लोगों को निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इसके अलावा 1 नवंबर से दिल्ली में कुछ बाहरी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लागू हुआ। दिल्ली के बाहर पंजीकृत पेट्रोल और डीजल वाहनों को, यदि वे BS-VI उत्सर्जन मानक के अनुरूप नहीं हैं, राजधानी में प्रवेश की अनुमति नहीं है।
इस नियम का असर दिल्ली और NCR के बीच रोजाना सफर करने वाले लोगों पर पड़ा है। कई यात्रियों को अपनी निजी गाड़ियों के बजाय मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन विकल्पों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
हालांकि, मेट्रो में बढ़ी बोर्डिंग के पीछे केवल GRAP-1 को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। वाहनों पर पाबंदियां, प्रदूषण की स्थिति और रोजमर्रा की यात्रा की जरूरतें भी इसमें भूमिका निभा सकती हैं।
यात्रियों की सुविधा के लिए 40 अतिरिक्त ट्रेन ट्रिप
दिल्ली मेट्रो ने बढ़ती यात्रियों की संख्या को संभालने के लिए अतिरिक्त ट्रेन सेवाएं शुरू की हैं। DMRC ने 22 अक्टूबर से सप्ताह के कार्यदिवसों में 20 अतिरिक्त ट्रेन ट्रिप चलानी शुरू की थीं।
इसके बाद 2 नवंबर से 20 और अतिरिक्त ट्रिप जोड़ी गईं। इस तरह अब मेट्रो नेटवर्क पर कुल 40 अतिरिक्त ट्रेन ट्रिप संचालित की जा रही हैं।
इन अतिरिक्त सेवाओं का उद्देश्य व्यस्त समय में यात्रियों की भीड़ को संभालना और सफर को अधिक सुविधाजनक बनाना है। मेट्रो प्रशासन जरूरत के अनुसार स्टेशनों पर भी अतिरिक्त इंतजाम कर रहा है।
दिल्ली मेट्रो के अधिकारियों के अनुसार, यात्रियों की आवाजाही पर लगातार नजर रखी जा रही है। जहां जरूरत होती है, वहां यात्रियों की सुविधा के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएं की जाती हैं।
दिल्ली-NCR के यात्रियों के लिए मेट्रो क्यों बनी अहम?
दिल्ली और आसपास के शहरों से रोजाना बड़ी संख्या में लोग काम, पढ़ाई और अन्य जरूरी कामों के लिए राजधानी आते हैं। ऐसे में मेट्रो उनके लिए परिवहन का महत्वपूर्ण साधन है।
दिल्ली मेट्रो का नेटवर्क राजधानी के कई प्रमुख इलाकों को जोड़ता है। इसके जरिए नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे NCR क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग सफर करते हैं।
वाहनों पर पाबंदी लगने के बाद ऐसे यात्रियों के सामने वैकल्पिक परिवहन चुनने की जरूरत बढ़ गई है। मेट्रो उन्हें सड़क के ट्रैफिक से बचने और तय समय में अपनी मंजिल तक पहुंचने का विकल्प देती है।
इसके अलावा मेट्रो से सफर करने पर निजी वाहनों की संख्या कम करने में भी मदद मिल सकती है। इससे सड़क पर वाहनों का दबाव और उनसे होने वाले उत्सर्जन को घटाने में सहायता मिल सकती है।
GRAP-1 में क्या-क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
GRAP यानी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लागू किया जाता है। इसके अलग-अलग चरण वायु गुणवत्ता के स्तर के आधार पर लागू होते हैं।
GRAP का पहला चरण तब लागू होता है, जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI 201 से 300 के बीच पहुंचता है। इसे खराब श्रेणी माना जाता है।
इस चरण में प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण के लिए कई कदम उठाए जाते हैं। इनमें निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, सड़कों की सफाई और कचरे के खुले में जलने पर निगरानी जैसे उपाय शामिल हैं।
दिल्ली मेट्रो भी अपने निर्माण स्थलों और आसपास के क्षेत्रों में धूल कम करने के लिए कदम उठा रही है। DMRC ने निर्माण स्थलों, स्टेशनों और कार्यालयों में 250 से ज्यादा एंटी-स्मॉग और मिस्ट गन लगाने की जानकारी दी है।
इसके साथ ही निर्माण सामग्री को ढककर रखने और निर्माण वाहनों के पहियों की सफाई जैसी व्यवस्थाओं की जांच भी की जा रही है।
क्या आगे भी मेट्रो में बढ़ी रहेगी यात्रियों की संख्या?
दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू पाबंदियों के बीच मेट्रो में यात्रियों की संख्या पर नजर बनी रहेगी। अगर निजी वाहनों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध जारी रहते हैं, तो सार्वजनिक परिवहन की मांग भी प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, यात्रियों की संख्या मौसम, कार्यालयों के कामकाज, सप्ताह के दिन और परिवहन व्यवस्था जैसे कई कारकों पर निर्भर करती है। इसलिए एक दिन के आंकड़े से आने वाले दिनों की स्थिति तय नहीं की जा सकती।
DMRC ने अतिरिक्त ट्रेन ट्रिप के जरिए यात्रियों को सुविधा देने की कोशिश की है। जरूरत के अनुसार मेट्रो प्रशासन आगे भी सेवाओं और स्टेशन व्यवस्थाओं में बदलाव कर सकता है।
निष्कर्ष
दिल्ली में GRAP के उपायों और पुराने बाहरी वाहनों पर पाबंदियों के बीच मेट्रो में यात्रियों की आवाजाही बढ़ी है। 2 नवंबर को 80.54 लाख बोर्डिंग दर्ज की गईं, जो पिछले सोमवार से करीब 8.30 लाख ज्यादा हैं।
बढ़ती भीड़ को संभालने के लिए DMRC अब रोजाना 40 अतिरिक्त ट्रेन ट्रिप चला रही है। यह बदलाव दिल्ली-NCR में सार्वजनिक परिवहन की बढ़ती जरूरत को दिखाता है। आने वाले दिनों में प्रदूषण और वाहनों पर लागू नियमों के बीच मेट्रो की यात्रियों की संख्या पर सबकी नजर रहेगी।

