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दिल्ली-NCR में प्रदूषण का अलर्ट, GRAP-3 लागू; स्कूलों में हाइब्रिड पढ़ाई और WFH व्यवस्था

दिल्ली में इंडिया गेट के सामने छाई धुंध के बीच मास्क पहने स्कूली बच्चे, जहाँ जहरीली हवा के कारण GRAP-3 लागू होने और 5वीं तक के स्कूल बंद होने की जानकारी है - न्यूज़ क्रिटिक

दिल्ली-NCR में जहरीली होती हवा ने एक बार फिर लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वायु गुणवत्ता बिगड़ने के बाद वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने 6 नवंबर को पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी GRAP का तीसरा चरण लागू कर दिया। यह फैसला प्रदूषण को और गंभीर होने से रोकने के लिए एहतियात के तौर पर लिया गया है।

दिल्ली में 6 नवंबर को औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 382 दर्ज किया गया था। यह स्तर ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर इससे भी अधिक रहा। ऐसे हालात में बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों के लिए विशेष सावधानी जरूरी हो गई है।

GRAP-3 लागू होने के बाद निर्माण गतिविधियों, वाहनों और स्कूलों को लेकर कई पाबंदियां प्रभावी हुई हैं। दिल्ली सरकार ने पांचवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के लिए हाइब्रिड पढ़ाई की व्यवस्था लागू की है।

पांचवीं तक के स्कूलों में हाइब्रिड मोड लागू

प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए दिल्ली सरकार ने पांचवीं कक्षा तक के स्कूलों को हाइब्रिड मोड में पढ़ाई कराने का निर्देश दिया है। इसके तहत विद्यार्थी स्कूल जाकर पढ़ाई कर सकते हैं। जहां ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध है, वहां घर से पढ़ने का विकल्प भी मिलेगा।

यह व्यवस्था दिल्ली के साथ-साथ NCR के प्रमुख जिलों में भी लागू की गई है। इनमें नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत शामिल हैं। ऑनलाइन कक्षाओं का विकल्प चुनने का फैसला अभिभावक और विद्यार्थी कर सकते हैं।

इसका उद्देश्य छोटे बच्चों को प्रदूषित हवा के सीधे संपर्क से बचाना है। हालांकि, इसे सभी स्कूलों को पूरी तरह बंद करने का आदेश नहीं समझना चाहिए। स्कूलों में भौतिक कक्षाएं जारी रह सकती हैं और ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा।

दिल्ली शिक्षा विभाग ने 6 नवंबर को इस संबंध में सर्कुलर जारी किया। स्कूल प्रमुखों को अभिभावकों तक आदेश की जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकारी और निजी दफ्तरों में 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम

दिल्ली-NCR में दफ्तरों के संचालन को लेकर भी व्यवस्था लागू है। CAQM ने 30 अक्टूबर को एहतियाती उपायों के तहत सरकारी और निजी कार्यालयों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों की उपस्थिति का निर्देश दिया था। बाकी कर्मचारियों को घर से काम करने की व्यवस्था में रखा जाना है।

यह व्यवस्था 5 नवंबर से 20 नवंबर तक के लिए तय की गई है। इसका दायरा दिल्ली और NCR के छह जिलों तक है। इनमें दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर शामिल हैं।

इसका मकसद सड़कों पर निजी वाहनों की संख्या घटाना और उनसे होने वाले प्रदूषण को कम करना है। हालांकि, जरूरी सेवाओं और ऐसे औद्योगिक प्रतिष्ठानों को छूट दी गई है, जहां घर से काम करना संभव नहीं है।

इसलिए यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम का निर्देश GRAP-3 लागू होने के बाद पहली बार जारी नहीं हुआ है। यह 30 अक्टूबर के अलग एहतियाती आदेश का हिस्सा है।

पुराने पेट्रोल और डीजल वाहनों पर सख्ती

GRAP-3 के तहत पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। दिल्ली और निर्धारित NCR जिलों में BS-III पेट्रोल तथा BS-IV डीजल मानक वाले हल्के मोटर वाहनों को चलाने की अनुमति नहीं होगी।

यह प्रतिबंध दिल्ली के अलावा गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में लागू है। दिव्यांग व्यक्तियों के निजी इस्तेमाल के लिए विशेष रूप से अनुकूलित वाहनों को निर्धारित छूट दी गई है।

दिल्ली में कुछ पुराने डीजल मालवाहक वाहनों की आवाजाही पर भी पाबंदियां लगाई गई हैं। दूसरे राज्यों से आने वाले कुछ डीजल मालवाहक वाहनों के प्रवेश को भी प्रतिबंधित किया गया है।

प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस को इन नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी दी गई है। वाहन चालकों को घर से निकलने से पहले अपने वाहन का उत्सर्जन मानक और लागू प्रतिबंध जरूर जांचना चाहिए।

निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर रोक

प्रदूषण में धूल और निर्माण गतिविधियों की भूमिका को देखते हुए GRAP-3 के तहत कई कामों पर रोक लगाई गई है। गैर-जरूरी निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियां बंद रहेंगी।

इनमें मुख्य रूप से निम्न काम शामिल हैं:

  • मिट्टी की खुदाई और बड़े स्तर पर अर्थवर्क।
  • पाइलिंग और खुले गड्ढों की खुदाई।
  • गैर-जरूरी इमारतों को तोड़ने का काम।
  • निर्माण स्थलों पर धूल फैलाने वाली गतिविधियां।
  • खुले में रेडी मिक्स कंक्रीट प्लांट का संचालन।

रेत और सीमेंट जैसी निर्माण सामग्री के परिवहन पर भी सख्ती रहेगी। खासतौर पर बिना पक्की सड़कों पर ऐसी सामग्री ले जाने से धूल फैलने का खतरा रहता है।

स्टोन क्रशर, खनन गतिविधियों और स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल नहीं करने वाले हॉट मिक्स प्लांट पर भी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, अस्पताल, मेट्रो, रेलवे, एयरपोर्ट और जरूरी सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी कुछ परियोजनाओं को निर्धारित शर्तों के तहत छूट मिल सकती है।

डीजल जनरेटर और औद्योगिक गतिविधियों पर नियंत्रण

GRAP-3 के तहत डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर भी पाबंदियां लागू होती हैं। आपातकालीन और जरूरी सेवाओं को निर्धारित छूट मिलती है। सामान्य परिस्थितियों में प्रदूषण बढ़ाने वाले जनरेटर के इस्तेमाल को रोकने का उद्देश्य है।

प्रशासन को औद्योगिक इकाइयों की निगरानी करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय निकायों की टीमें भी अलग-अलग क्षेत्रों में निरीक्षण कर सकती हैं।

निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपायों का पालन जरूरी है। पानी का छिड़काव, ढकी हुई निर्माण सामग्री और उचित कचरा प्रबंधन जैसे कदम प्रदूषण कम करने में मदद कर सकते हैं।

GRAP-3 लागू करने की जरूरत क्यों पड़ी?

दिल्ली-NCR में सर्दियों के दौरान प्रदूषण बढ़ने के कई कारण हैं। तापमान में गिरावट और हवा की कम गति के कारण प्रदूषक वातावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं। इससे हवा की गुणवत्ता तेजी से बिगड़ सकती है।

वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण स्थलों की धूल और औद्योगिक उत्सर्जन भी प्रदूषण बढ़ाते हैं। इसके अलावा आसपास के राज्यों में पराली और अन्य जैविक पदार्थ जलाने से निकलने वाला धुआं भी हवा को प्रभावित कर सकता है।

दिल्ली में प्रदूषण का असर केवल राजधानी तक सीमित नहीं रहता। हवा की दिशा और मौसम के कारण इसका प्रभाव नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहरों में भी दिखाई देता है।

इसी वजह से CAQM ने पूरे NCR में GRAP-3 की कार्रवाई लागू की है। आयोग मौसम और वायु गुणवत्ता के आंकड़ों पर लगातार नजर रखता है। जरूरत पड़ने पर प्रतिबंधों की समीक्षा भी की जा सकती है।

लोगों को किन बातों का रखना चाहिए ध्यान?

प्रदूषण के इस दौर में लोगों को अपनी सेहत को प्राथमिकता देनी चाहिए। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस की समस्या से जूझ रहे लोगों को बाहर निकलते समय सावधानी रखनी चाहिए।

नागरिक कुछ जरूरी कदम अपना सकते हैं:

  • बहुत जरूरी न हो तो प्रदूषण अधिक रहने के समय बाहर जाने से बचें।
  • कम दूरी के लिए पैदल चलने या साइकिल का विकल्प अपनाएं।
  • निजी वाहन के बजाय मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें।
  • खुले में कचरा, पत्तियां या अन्य सामग्री न जलाएं।
  • घर और आसपास धूल उड़ने से रोकने के उपाय करें।
  • बच्चों की बाहरी गतिविधियां सीमित रखें और स्कूल के निर्देशों का पालन करें।

साथ ही, आंखों में जलन, खांसी या सांस लेने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। केवल मास्क पर निर्भर रहने के बजाय प्रदूषण के संपर्क को कम करना भी महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

दिल्ली-NCR में GRAP-3 लागू होने से प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं। पांचवीं तक के विद्यार्थियों के लिए हाइब्रिड कक्षाएं, पुराने वाहनों पर प्रतिबंध और गैर-जरूरी निर्माण गतिविधियों पर रोक इसी व्यवस्था का हिस्सा हैं।

दफ्तरों में 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम की व्यवस्था 5 से 20 नवंबर तक पहले से तय एहतियाती आदेश के तहत लागू है। अब इन उपायों का असर कितना पड़ता है, यह आने वाले दिनों की वायु गुणवत्ता से स्पष्ट होगा। फिलहाल प्रशासन के साथ नागरिकों की जिम्मेदारी भी अहम है।

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