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MP में सफाईकर्मियों की सैलरी 20 हजार तक बढ़ेगी, दैनिक वेतनभोगी होंगे स्थायी; CM से मुलाकात के बाद हड़ताल खत्म

मध्य प्रदेश के सफाई कर्मचारियों की तस्वीर, जिसमें उनकी सैलरी 20 हजार तक बढ़ने और हड़ताल खत्म होने की जानकारी है - न्यूज़ क्रिटिक

मध्य प्रदेश में सफाईकर्मियों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद कर्मचारियों ने अपनी हड़ताल खत्म कर दी है। सरकार ने वेतन बढ़ाने और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को स्थायी करने की प्रक्रिया शुरू करने का भरोसा दिया है।

इस फैसले के बाद 25 दिन काम करने वाले सफाईकर्मियों की सैलरी 18 से 20 हजार रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। वहीं, 29 दिन काम करने वाले और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के नियमितीकरण पर भी कार्रवाई होगी।

शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को मुख्यमंत्री निवास पर कर्मचारी प्रतिनिधिमंडल और सरकार के बीच बातचीत हुई। इसके बाद कर्मचारी काम पर लौट आए। भोपाल सहित कई शहरों में सफाई अभियान दोबारा शुरू हो गया है।

CM मोहन यादव से मुलाकात के बाद बनी सहमति

सफाई कर्मचारी पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि, नियमितीकरण और दूसरी सुविधाओं की मांग उठाई थी। इस आंदोलन के कारण नगर निगम का कामकाज भी प्रभावित हुआ।

शुक्रवार को राज्य मंत्री कृष्णा गौर के नेतृत्व में कर्मचारी प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री निवास पहुंचा। यहां मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ कर्मचारियों की समस्याओं पर चर्चा हुई।

बैठक में कर्मचारियों ने अपनी पुरानी मांगों को दोबारा सामने रखा। इनमें वेतन बढ़ाना, नौकरी में स्थायित्व और ठेका प्रथा समाप्त करना प्रमुख मुद्दे थे।

मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों की समस्याओं पर सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया। इसके बाद कर्मचारी संगठनों ने आंदोलन वापस लेने का फैसला किया।

मुख्यमंत्री ने सफाई कर्मचारियों के काम को महत्वपूर्ण बताते हुए उनके साथ मिलकर काम करने की बात कही। वहीं, कर्मचारी संगठनों ने भी काम पर लौटने की घोषणा की।

10,500 से 25 हजार रुपये वेतन करने की थी मांग

सफाई कर्मचारियों की प्रमुख मांग वेतन बढ़ाने से जुड़ी थी। कर्मचारी चाहते थे कि 25 दिन काम करने वालों का मासिक वेतन बढ़ाया जाए।

फिलहाल इन कर्मचारियों को करीब 10,500 रुपये मिल रहे थे। कर्मचारी इसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की मांग कर रहे थे।

हालांकि, बातचीत के बाद सरकार ने 25 दिवसीय कर्मचारियों को विनियमितीकरण की प्रक्रिया में शामिल करने का भरोसा दिया है।

इससे उनकी मासिक सैलरी बढ़कर करीब 18 से 20 हजार रुपये हो सकती है। यह बढ़ोतरी संबंधित प्रक्रिया पूरी होने के बाद लागू होगी।

इस फैसले से उन कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से कम वेतन पर काम कर रहे हैं।

दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को भी मिलेगा फायदा

इस समझौते का फायदा केवल 25 दिवसीय कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। सरकार ने 29 दिवसीय और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के स्थायीकरण की प्रक्रिया शुरू करने का भरोसा भी दिया है।

इस संबंध में एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है। इसमें कर्मचारी संगठन के प्रतिनिधियों को भी शामिल करने की बात कही गई है।

समिति के सामने प्रमुख रूप से ये मुद्दे रखे गए हैं:

  • 25 दिवसीय कर्मचारी: इन्हें विनियमितीकरण की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।
  • 29 दिवसीय कर्मचारी: इनके स्थायीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी।
  • दैनिक वेतनभोगी: पात्र कर्मचारियों को नियमित करने पर कार्रवाई होगी।
  • 10 साल की सेवा: दस वर्ष पूरे कर चुके दैनिक वेतनभोगियों के विनियमितीकरण पर विचार होगा।
  • वेतन वृद्धि: निर्धारित पात्रता में नहीं आने वाले कर्मचारियों का वेतन 18 से 19 हजार रुपये करने पर विचार होगा।
  • अनुकंपा नियुक्ति: दिवंगत कर्मचारियों के पति या पत्नी के लंबित मामलों पर कार्रवाई होगी।

इन मांगों पर आगे की प्रक्रिया समिति के माध्यम से पूरी की जाएगी। कर्मचारी संगठनों को एक महीने के भीतर कार्रवाई शुरू होने का भरोसा दिया गया है।

ठेका प्रथा खत्म करने की मांग भी उठी

सफाई कर्मचारियों की एक बड़ी मांग ठेका प्रथा समाप्त करने से जुड़ी है। कर्मचारियों का कहना है कि ठेके पर काम करने से नौकरी की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर समस्याएं आती हैं।

कर्मचारी चाहते हैं कि उन्हें सीधे विभागीय व्यवस्था के तहत काम करने का अवसर मिले। इससे नौकरी में स्थायित्व और भविष्य को लेकर सुरक्षा मिल सकती है।

बैठक में इस मुद्दे पर भी चर्चा हुई। ठेका प्रथा समाप्त करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को विधिवत प्रस्ताव भेजने की बात सामने आई है।

हालांकि, इस व्यवस्था को समाप्त करने के लिए आगे सरकारी प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसलिए इसे तत्काल लागू हुआ फैसला नहीं माना जा सकता।

इसके अलावा, कर्मचारियों ने अनुकंपा नियुक्ति के लंबित मामलों को भी जल्द सुलझाने की मांग रखी। कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके परिवार को आर्थिक सहारा मिल सके, इसके लिए नियुक्ति प्रक्रिया महत्वपूर्ण है।

तीन दिन की हड़ताल से भोपाल में बिगड़ी सफाई व्यवस्था

कर्मचारियों की हड़ताल का सबसे ज्यादा असर राजधानी भोपाल में दिखाई दिया। कचरा संग्रहण और सफाई का काम रुकने से कई इलाकों में गंदगी जमा हो गई थी।

प्रमुख सड़कों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरे के ढेर दिखाई देने लगे थे। रिपोर्ट के अनुसार, भोपाल की सड़कों पर करीब 2,550 टन कचरा जमा हो गया था।

इस बीच आंदोलन का असर पानी की सप्लाई पर भी पड़ा। शुक्रवार को प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने टैंकरों से पानी की आपूर्ति रोक दी थी। इससे कई इलाकों में पानी की समस्या पैदा हुई।

सफाई व्यवस्था प्रभावित होने के कारण आम नागरिकों को काफी परेशानी हुई। बाजारों और रिहायशी इलाकों में कचरा जमा होने से लोगों की चिंता बढ़ गई थी।

वहीं, हड़ताल खत्म होने के बाद नगर निगम प्रशासन ने सफाई अभियान तेज कर दिया।

अधिकारियों ने कर्मचारियों के साथ चलाया सफाई अभियान

हड़ताल समाप्त होने के बाद भोपाल में सफाई व्यवस्था बहाल करने की तैयारी शुरू हुई। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, महापौर मालती राय और नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार भी मैदान में पहुंचे।

तीनों अधिकारियों ने सफाईकर्मियों के साथ 10 नंबर मार्केट में सफाई अभियान में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने झाड़ू लगाकर कर्मचारियों का उत्साह बढ़ाया।

नगर निगम ने अतिरिक्त वाहनों और कर्मचारियों को भी सफाई कार्य में लगाया। अधिकारियों ने संबंधित अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए।

इसके अलावा, शहर के अलग-अलग वार्डों में जमा कचरे को हटाने का काम शुरू किया गया। त्योहार के दौरान बाजारों में बढ़ती भीड़ को देखते हुए सफाई पर विशेष ध्यान दिया गया।

अब कर्मचारियों के वापस लौटने से नगर निगम को राहत मिली है। हालांकि, पूरी व्यवस्था सामान्य करने के लिए लगातार सफाई अभियान चलाना जरूरी होगा।

सरकार के सामने अब एक महीने में प्रक्रिया शुरू करने की चुनौती

मुख्यमंत्री के साथ बैठक के बाद कर्मचारियों ने हड़ताल तो खत्म कर दी है। लेकिन उनकी कई मांगों पर वास्तविक कार्रवाई अभी बाकी है।

सरकार को अब नियमितीकरण और वेतन वृद्धि से जुड़े फैसलों को प्रक्रिया में लाना होगा। इसके लिए बनाई गई समिति की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।

समिति कर्मचारियों की सेवा अवधि, कार्य के दिनों और पात्रता से जुड़े मामलों की जांच करेगी। इसके बाद संबंधित विभागों को जरूरी प्रस्ताव और सिफारिशें भेजी जा सकती हैं।

विशेष रूप से दस साल की सेवा पूरी कर चुके दैनिक वेतनभोगियों का मामला अहम रहेगा। वहीं, अन्य कर्मचारियों के वेतन और सेवा शर्तों पर भी विचार करना होगा।

कर्मचारी संगठनों की नजर अब सरकार की अगली कार्रवाई पर रहेगी। उन्हें उम्मीद है कि तय समय में प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान होगा।

निष्कर्ष

मध्य प्रदेश में सफाईकर्मियों की हड़ताल खत्म होने से नगर निगम और आम नागरिकों को राहत मिली है। मुख्यमंत्री से बातचीत के बाद वेतन वृद्धि और नियमितीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का भरोसा दिया गया है।

MP सफाईकर्मियों की सैलरी 18 से 20 हजार रुपये तक होने की उम्मीद है। वहीं, दैनिक वेतनभोगियों और 29 दिवसीय कर्मचारियों के स्थायीकरण पर भी कार्रवाई होगी। अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार एक महीने के भीतर इन फैसलों को लेकर कितनी प्रगति करती है।

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