May 17, 2026

News Critic

Latest News In Hindi

चंद्रयान 3 की सफल लैंडिंग के बाद इसरो के चेयरमैन एस सोमनाथ ने बताया दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग का कारण और प्रज्ञान रोवर की कार्यप्रणाली के बारे में

चंद्रयान 3 ने चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग कर के भारत ने इतिहास रच दिया है। इसके बाद इसरो के चेयरमैन एस सोमनाथ ने मीडिया के साथ बातचीत कर इस मिशन में योगदान देने वालों का धन्यबाद किया। इसके बाद एस सोमनाथ ने चंद्रयान 3 के रोवर प्रज्ञान और उसकी कार्यप्रणाली के बारे में मीडिया को बताया। इसके अलावा उन्होंने इसरो के अन्य परीक्षणों के बारे में भी बताया।

चंद्रयान 3 की चाँद पर सफल लैंडिंग के बाद भारत चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला पहला देश बन गया है। इसके अलावा चाँद पर पहुंचने वाला चौथा देश बन गया है। भारत से पहले अमेरिका, रूस और चीन चाँद पर कदम रख चुके हैं।

प्रज्ञान रोवर की कार्यप्रणाली

इसरो के चेयरमैन एस सोमनाथ ने मीडिया से बातचीत करते हुए प्रज्ञान रोवर की कार्यप्रणाली के बारे में बताया। उन्होंने कहा  ‘प्रज्ञान रोवर के पास दो उपकरण है और ये दोनों ही चंद्रमा पर मौलिक संरचना के निष्कर्षों के साथ-साथ रसायनिक संरचनाओं से संबंधित हैं। इसके अलावा चांद  के सतह पर भी चक्कर लगाएगा। हम एक रोबोटिक पथ नियोजन अभ्यास भी करेंगे जो हमारे लिए भविष्य के अन्वेषणों के लिए महत्वपूर्ण है।’

चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग का कारण

चंद्रयान 3 ने जैसे ही चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड किया। तो लगभग सभी यह जानने के लिए उत्साहित हैं कि चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर ही क्यों चंद्रयान 3 को लैंड कराया गया। इसका कारण बताते हुए एस सोमनाथ ने कहा ‘चंद्रमा पर काम कर रहे वैज्ञानिकों ने चांद के दक्षिणी ध्रुव पर रुचि दिखाई, क्योंकि मनुष्य वहां जाना चाहता है और वहां कॉलोनी बसाना चाहता है और आगे जाना चाहता है। इसलिए हम ऐसे ही जगह की तलाश कर रहे थे और चांद के दक्षिणी ध्रुव में वह क्षमता है।’ उन्होंने बताया कि हम दक्षिणी ध्रुव के करीब चले गए जो लगभग 70 डिग्री है। सूर्य द्वारा कम प्रकाशित होने के संबंध में दक्षिणी ध्रुव पर एक विशिष्ट लाभ है।

इसरो के अगले मिशन के बारे में दी जानकारी

इसरो के चेयरमैन एस सोमनाथ ने चंद्रयान 3 की सफलता के बाद इसरो के अगले मिशन की जानकारी देते हुए कहा कि अब इसके बाद इसरो सूर्य के लिए आदित्य मिशन को सितम्बर में लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘हम क्रू मॉड्यूल और क्रू एस्केप क्षमता को प्रदर्शित करने के लिए संभवतः सितंबर या अक्टूबर के अंत तक एक मिशन करेंगे। इसके बाद जब तक हम संभवतः 2025 तक पहला मानव मिशन नहीं कर लेते, तब तक कई परीक्षण मिशन होंगे।’ उन्होंने बताया कि गगनयान पर भी काम चल रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *