सीएम ममता बनर्जी ने दुष्कर्म के दोषियों को फांसी की सजा देने का प्रावधान के लिए विधानसभा में पेश किया बिल
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज मंगलवार को विधानसभा में महिला सुरक्षा को लेकर एक बिल पेश किया। इस बिल के तहत दुष्कर्म के दोषियों को फांसी की सजा देने का प्रावधान किया गया है। ममता सरकार ने विधानसभा में ‘अपराजिता महिला एवं बाल विधेयक’ पेश किया है। मौजूदा कानून में बदलाव के बाद इस बिल को विधानसभा में पेश किया गया।
दरअसल कोलकत्ता आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में महिला ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या के मामले में ममता बनर्जी की सरकार बैकफुट पर है। इस केस के बाद ममता बनर्जी ने एलान किया था कि वह दुष्कर्म के लिए कानून बनाएंगी। इसे लेकर उन्होंने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का भी एलान किया था। उस समय पर ममता बनर्जी ने कहा था कि वह चाहती हैं कि पीड़िता को जल्द से जल्द न्याय मिले। विधानसभा में पेश हुए इस बिल का बीजेपी ने भी समर्थन किया।
अपराजिता महिला एवं बाल विधेयक की प्रमुख बातें
पश्चिम बंगाल विधानसभा में पेश हुए अपराजिता महिला एवं बाल विधेयक बिल की तीन प्रमुख बाते हैं, जो दुष्कर्म के दोषियों को कड़ी सजा देने का प्रावधान कर रही हैं।
* किसी महिला का दुष्कर्म करने के बाद अगर उसकी हत्या कर दी जाती है तो ऐसा करने वाले दोषी को मृत्युदंड दिया जाएगा।
* किसी महिला के साथ दुष्कर्म किया गया तो इस अपराध को अंजाम देने वाले दोषी को आजीवन कारावास की सजा दी जाएगी।
* किसी नाबालिग के साथ दुष्कर्म होता है तो उसके आपराधिक दोषी को 20 साल की कैद और मौत की सजा दोनों का प्रावधान है।
इस बिल की ये तीन बड़ी बातें हैं, जिसे केंद्र सरकार के कानून में संशोधन के बाद पेश किया गया है। केंद्र सरकार का दुष्कर्म को लेकर जो कानून है, उसमें पूरी तरह से बदलाव नहीं किया जाएगा। मगर इस नए कानून के जरिए 21 दिनों में न्याय सुनिश्चित होगा। अगर 21 दिनों में फैसला नहीं आ पाता है तो पुलिस अधीक्षक की इजाजत से 15 दिन और मिल जाएंगे। यह समवर्ती सूची में है और हर राज्य को संशोधन करने का अधिकार है।
राज्यपाल के पास भेजा गया बिल
विधानसभा में बिल को पास कराने के बाद अब इस बिल को राज्यपाल सीवी आनंद बोस के पास भेजा गया है। उम्मीद लगायी जा रही है कि राज्यपाल सीवी आनंद बोस भी इस बिल पर अपने हस्ताक्षर कर इसे पास कर देंगे। राज्य में किसी भी नए कानून को मान्यता राज्यपाल की मंजूरी से ही मिलती है। अगर राज्यपाल की राय इस बिल को कानून में तब्दील करने को लेकर नहीं बन पाती है तो वह इसे राष्ट्रपति के पास भेज सकते हैं।
