राहुल गाँधी के लोकसभा में दिए भाषण के कुछ अंशों को हटाने पर, लोकसभा अध्यक्ष को लिखी चिट्ठी
कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने लोकसभा में दिए अपने भाषण के कुछ अंशों को कार्यवाही से हटाने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को चिट्ठी लिखी। उन्होंने अपनी चिट्ठी में लिखा कि मेरे विचारों को लोकसभा की कार्यवाही से हटाना संसदीय लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है। ऐसे में मेरे भाषण से हटाए गए अंशों को फिर से बहाल किया जाना चाहिए।
राहुल गाँधी ने बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि उनके भाषण में भी आरोपों की भरमार थी। लेकिन उनके भाषण से केवल एक शब्द को हटाया गया। इसको लेकर किया गया भेदभाव समझ के परे है।
राहुल गाँधी ने अपने भाषण में कहा
कांग्रेस नेता राहुल गाँधी ने लोकसभा में बीजेपी पर देश में हिंसा, नफ़रत और डर फ़ैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा ये लोग हिंदू नहीं हैं क्योंकि 24 घंटे की हिंसा की बात करते हैं। इसके अलावा कोई काम नहीं है। राहुल गाँधी ने आगे कहा कि बीजेपी के लोग अल्पसंख्यकों, मुसलमानों, सिखों एवं ईसाइयों को डराते हैं, उन हमला करते हैं और उनके खिलाफ नफरत फैलाते हैं। लेकिन अल्पसंख्यक इस देश के साथ चट्टान की तरह मजबूती से खड़ा रहा है और उन्होंने अलग अलग क्षेत्रों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।
बीजेपी ने किया पलटवार
राहुल गाँधी के द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को चिट्ठी लिखे जाने पर बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर ने पलटवार करते हुए कहा कि राहुल गाँधी के भाषण से कुछ अंश हटाने का अधिकार लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के पास है।
दरअसल, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान लोकसभा में दिए गए राहुल गांधी के भाषण के कुछ अंश सोमवार 1 जुलाई 2024 को हटा दिए गए हैं। हटाए गए अंश में हिंदुओं और कुछ दूसरे धर्मों पर उनकी टिप्पणियां शामिल हैं।
