हरिद्वार में पहली बार भव्य दंडवत यात्रा, हजारों श्रद्धालुओं ने लिया हिस्सा; गंगा स्वच्छता का दिया संदेश
उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार में आस्था का अनोखा नजारा देखने को मिला। यहां पहली बार बड़े स्तर पर भव्य दंडवत यात्रा निकाली गई। इस धार्मिक आयोजन में देशभर से हजारों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।
श्रद्धालु जमीन पर लेटकर दंडवत प्रणाम करते हुए आगे बढ़े। करीब पांच किलोमीटर लंबी इस यात्रा का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ गंगा स्वच्छता और सनातन संस्कृति का संदेश देना था।
30 अक्टूबर 2026 को शुरू हुई इस यात्रा में बारिश और खराब मौसम भी श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं कर सके। बड़ी संख्या में साधक और भक्त इस आयोजन में शामिल हुए। यात्रा को लेकर हरिद्वार में कई दिनों से तैयारियां चल रही थीं।
दक्षेश्वर महादेव मंदिर से हरकी पैड़ी तक यात्रा
इस भव्य दंडवत यात्रा की शुरुआत कनखल स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर से हुई। यहां धार्मिक अनुष्ठान और भगवान शिव के रुद्राभिषेक के बाद यात्रा का शुभारंभ किया गया।
इसके बाद श्रद्धालु दंडवत करते हुए श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन की ओर से हरकी पैड़ी तक आगे बढ़े। इस दौरान भक्तों ने जमीन पर लेटकर प्रणाम किया और फिर उठकर कुछ दूरी तय की।
आयोजन से जुड़े लोगों के अनुसार, यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। देश के अलग-अलग राज्यों के अलावा नेपाल और अन्य देशों से भी भक्त हरिद्वार पहुंचे थे।
यात्रा का मार्ग करीब पांच किलोमीटर बताया गया। हालांकि, दंडवत तरीके से इतनी दूरी तय करना आसान नहीं था। इसके बावजूद श्रद्धालु पूरे उत्साह और धार्मिक भावना के साथ आगे बढ़ते रहे।
करौली शंकर महाराज के नेतृत्व में हुआ आयोजन
इस यात्रा का आयोजन श्री मिश्री मठ की ओर से किया गया। इसका नेतृत्व मिश्री मठ के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी करौली शंकर महाराज ने किया।
उन्होंने यात्रा के उद्देश्य के बारे में बताया कि यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं है। इसके माध्यम से आस्था, अनुशासन, साधना और सामाजिक समर्पण का संदेश दिया जा रहा है।
उनके अनुसार, दंडवत यात्रा से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही, समाज में आध्यात्मिक चेतना और आपसी सद्भाव बढ़ाने का संदेश भी दिया गया।
श्री पंचायती अखाड़ा नया उदासीन में संतों की उपस्थिति के बीच यात्रा को हरी झंडी दिखाई गई। इस अवसर पर कई संत, धार्मिक प्रतिनिधि और स्थानीय गणमान्य लोग मौजूद रहे।
हजारों श्रद्धालुओं ने बारिश के बीच दिखाई आस्था
हरिद्वार में यात्रा के दौरान मौसम भी चुनौती बना रहा। पिछले दो दिनों से क्षेत्र में बारिश हो रही थी। इसके बावजूद श्रद्धालुओं की भागीदारी में कमी नहीं दिखाई दी।
कई भक्त दंडवत करते हुए लगातार आगे बढ़ते रहे। वहीं, आयोजन स्थल पर अन्य श्रद्धालु भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।
आयोजकों के अनुसार, देश के विभिन्न हिस्सों से आए भक्तों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था की गई थी। इसके लिए कनखल स्थित नया अखाड़ा उदासीन और आसपास के आश्रमों का सहयोग लिया गया।
आयोजन को व्यवस्थित रखने के लिए बड़ी संख्या में स्वयंसेवक तैनात किए गए थे। उन्होंने श्रद्धालुओं की सुविधा, रास्ते की व्यवस्था और अन्य जरूरी जिम्मेदारियां संभालीं।
गंगा स्वच्छता और संरक्षण का भी लिया संकल्प
इस दंडवत यात्रा का एक प्रमुख उद्देश्य मां गंगा को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त रखने का संदेश देना था। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से गंगा की पवित्रता बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की।
करौली शंकर महाराज के अनुसार, धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण भी समाज की जिम्मेदारी है। गंगा देश की महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर है। इसलिए इसकी स्वच्छता के लिए जनभागीदारी जरूरी है।
इसी उद्देश्य से यात्रा के अगले चरण में गंगा सेवा अभियान आयोजित करने की योजना बनाई गई। इसके तहत 31 अक्टूबर को सुबह 10 बजे हरकी पैड़ी पर विशेष स्वच्छता अभियान रखा गया।
आयोजकों ने इस अभियान में करीब 10 हजार श्रद्धालुओं की भागीदारी का लक्ष्य रखा। वहीं, अलग-अलग रिपोर्टों में हजारों स्वयंसेवकों के सफाई अभियान में शामिल होने की जानकारी दी गई।
कुंभ 2027 को लेकर भी दिया संदेश
हरिद्वार में वर्ष 2027 में कुंभ का आयोजन होना है। इसे देखते हुए दंडवत यात्रा को धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आयोजकों ने यात्रा के माध्यम से आगामी कुंभ को भव्य और व्यवस्थित बनाने का संकल्प भी लिया। उनका कहना है कि धार्मिक आयोजनों में आम लोगों की भागीदारी से बेहतर माहौल तैयार होता है।
इसके अलावा, यात्रा में देश की एकता और अखंडता का संदेश भी दिया गया। श्रद्धालुओं ने सामाजिक सद्भाव और मानव कल्याण की कामना की।
आयोजन से जुड़े संतों ने कहा कि भारतीय संस्कृति में सेवा, त्याग और समर्पण का विशेष महत्व है। दंडवत यात्रा इन्हीं मूल्यों को आगे बढ़ाने का एक माध्यम है।
यात्रा के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर रहा ध्यान
इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने के कारण आयोजन की व्यवस्थाएं भी महत्वपूर्ण थीं। आयोजकों ने इसके लिए स्वयंसेवकों की टीम तैयार की थी।
श्रद्धालुओं के ठहरने, भोजन और यात्रा मार्ग पर जरूरी सुविधाओं का प्रबंध किया गया। इसके साथ ही, चिकित्सा सहायता के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था भी रखी गई थी।
दंडवत यात्रा में लंबे समय तक जमीन पर लेटकर आगे बढ़ना पड़ता है। इसलिए श्रद्धालुओं की सेहत और सुरक्षा पर ध्यान देना जरूरी था।
बारिश के कारण रास्ते में फिसलन जैसी परेशानियां भी हो सकती थीं। ऐसे में स्वयंसेवकों ने व्यवस्थाओं को संभालने में सहयोग किया।
पहली बार इतने बड़े स्तर पर आयोजन क्यों रहा खास?
हरिद्वार में धार्मिक यात्राएं और साधना से जुड़े आयोजन पहले भी होते रहे हैं। लेकिन इतने बड़े स्तर पर दंडवत यात्रा का आयोजन विशेष आकर्षण का केंद्र बना।
आयोजकों ने इसे हरिद्वार में पहली बार इतने व्यापक स्तर पर आयोजित दंडवत यात्रा बताया। इसमें देश के अलग-अलग राज्यों और विदेशों से आए श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया।
इस आयोजन की खास बात यह रही कि भक्तों ने केवल धार्मिक अनुष्ठान तक अपनी भागीदारी सीमित नहीं रखी। उन्होंने गंगा संरक्षण, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक जागरूकता का संदेश भी दिया।
इसके अलावा, यात्रा ने कुंभ 2027 से पहले हरिद्वार में धार्मिक गतिविधियों को लेकर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। आने वाले समय में गंगा स्वच्छता जैसे अभियानों में आम लोगों की भागीदारी कितनी बढ़ती है, यह भी महत्वपूर्ण रहेगा।
निष्कर्ष
हरिद्वार दंडवत यात्रा ने धर्मनगरी में आस्था और भक्ति का अनोखा दृश्य प्रस्तुत किया। हजारों श्रद्धालुओं ने करीब पांच किलोमीटर तक दंडवत करते हुए धार्मिक समर्पण का परिचय दिया।
इस आयोजन के जरिए सनातन संस्कृति के प्रचार, गंगा स्वच्छता और कुंभ 2027 की तैयारियों का संदेश दिया गया। बारिश के बीच भी श्रद्धालुओं की भागीदारी ने आयोजन को विशेष बना दिया। अब गंगा सेवा अभियान के जरिए इस संकल्प को आगे बढ़ाने की तैयारी है।

